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ॐ

अहोबिल मठ तिरुनक्षत्रम 2084

इस वर्ष श्री अहोबिल मठ के सभी अऴगियसिंगर तिरुनक्षत्रम, आपके शहर के लिए

📍 बेंगलुरु, भारत
इस वर्ष की तिरुनक्षत्रम तिथियाँ · बेंगलुरु
2 जनवरी 2084
रविवार
4वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · चित्रा
4 जनवरी 2084
मंगलवार
30वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास वेदान्त यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · विशाखा
4 जनवरी 2084
मंगलवार
40वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · विशाखा
12 जनवरी 2084
बुधवार
41वें अऴगियसिंगर (श्री लक्ष्मीनृसिंह शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · पूर्वाभाद्रपद
21 जनवरी 2084
शुक्रवार
38वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
थाई · आर्द्रा
29 जनवरी 2084
शनिवार
15वें अऴगियसिंगर (श्री कल्याण वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
थाई · चित्रा
5 फ़रवरी 2084
शनिवार
42वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीरंग शठकोप यतीन्द्र महादेशिक, इंजिमेडु)
थाई · उत्तराषाढ़ा
6 फ़रवरी 2084
रविवार
3वें अऴगियसिंगर (श्री परांकुश यतीन्द्र महादेशिक)
थाई · श्रवण
8 फ़रवरी 2084
मंगलवार
6वें अऴगियसिंगर (श्री षष्ठ परांकुश यतीन्द्र महादेशिक)
थाई · पूर्वाभाद्रपद
19 फ़रवरी 2084
शनिवार
37वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव शठकोप यतीन्द्र महादेशिक, पिळ्ळैप्पाक्कम)
मासी · पुष्य
21 फ़रवरी 2084
सोमवार
19वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
मासी · मघा
23 मार्च 2084
गुरुवार
21वें अऴगियसिंगर (श्री परांकुश यतीन्द्र महादेशिक)
पंगुनी · हस्त
20 अप्रैल 2084
गुरुवार
29वें अऴगियसिंगर (श्री परांकुश रामानुज यतीन्द्र महादेशिक)
चित्तिरै · चित्रा
30 अप्रैल 2084
रविवार
32वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
चित्तिरै · पूर्वाभाद्रपद
10 मई 2084
बुधवार
24वें अऴगियसिंगर (श्री परांकुश रामानुज यतीन्द्र महादेशिक)
चित्तिरै · पुनर्वसु
19 मई 2084
शुक्रवार
10वें अऴगियसिंगर
वैकासी · विशाखा
19 मई 2084
शुक्रवार
7वें अऴगियसिंगर (श्री शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
वैकासी · विशाखा
21 मई 2084
रविवार
35वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ शठकोप यतीन्द्र महादेशिक, कळत्तूर)
वैकासी · ज्येष्ठा
26 मई 2084
शुक्रवार
27वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
वैकासी · धनिष्ठा
1 जून 2084
गुरुवार
39वें अऴगियसिंगर (श्री परांकुश यतीन्द्र महादेशिक)
वैकासी · भरणी
20 जून 2084
मंगलवार
13वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
आनी · उत्तराषाढ़ा
25 जून 2084
रविवार
23वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
आनी · उत्तराभाद्रपद
3 जुलाई 2084
सोमवार
9वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
आनी · आर्द्रा
7 जुलाई 2084
शुक्रवार
46वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ यतीन्द्र महादेशिक)
आनी · मघा
28 जुलाई 2084
शुक्रवार
22वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
आडि · रोहिणी
1 अगस्त 2084
मंगलवार
36वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
आडि · पुष्य
4 अगस्त 2084
शुक्रवार
26वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ यतीन्द्र महादेशिक)
आडि · पूर्वाफाल्गुनी
8 अगस्त 2084
मंगलवार
25वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
आडि · स्वाती
14 अगस्त 2084
सोमवार
14वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
आडि · उत्तराषाढ़ा
3 सितंबर 2084
रविवार
44वें अऴगियसिंगर (श्री वेदान्त देशिक यतीन्द्र महादेशिक, मुक्कूर)
आवणि · हस्त
8 सितंबर 2084
शुक्रवार
2वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
आवणि · ज्येष्ठा
9 सितंबर 2084
शनिवार
28वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
आवणि · मूल
26 सितंबर 2084
मंगलवार
18वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · आश्लेषा
28 सितंबर 2084
गुरुवार
12वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · पूर्वाफाल्गुनी
3 अक्टूबर 2084
मंगलवार
33वें अऴगियसिंगर (श्री शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · विशाखा
5 अक्टूबर 2084
गुरुवार
1वें अऴगियसिंगर (श्री आदिवण् शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · ज्येष्ठा
6 अक्टूबर 2084
शुक्रवार
20वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · मूल
10 अक्टूबर 2084
मंगलवार
17वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव वेदान्त यतीन्द्र महादेशिक)
पुरट्टासि · शतभिषा
2 नवंबर 2084
गुरुवार
11वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
अइप्पसी · मूल
21 नवंबर 2084
मंगलवार
31वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण वेदान्त यतीन्द्र महादेशिक)
कार्तिकई · मघा
30 नवंबर 2084
गुरुवार
43वें अऴगियसिंगर (श्री वीरराघव शठकोप यतीन्द्र महादेशिक, देवनार्विळागम)
कार्तिकई · पूर्वाषाढ़ा
1 दिसंबर 2084
शुक्रवार
34वें अऴगियसिंगर (श्री रामानुज यतीन्द्र महादेशिक)
कार्तिकई · उत्तराषाढ़ा
6 दिसंबर 2084
बुधवार
45वें अऴगियसिंगर (श्री नारायण यतीन्द्र महादेशिक, विल्लिवलम)
कार्तिकई · उत्तराभाद्रपद
10 दिसंबर 2084
रविवार
5वें अऴगियसिंगर (श्री सर्वतन्त्र स्वतन्त्र शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
कार्तिकई · कृत्तिका
22 दिसंबर 2084
शुक्रवार
4वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · चित्रा
24 दिसंबर 2084
रविवार
30वें अऴगियसिंगर (श्री श्रीनिवास वेदान्त यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · विशाखा
24 दिसंबर 2084
रविवार
40वें अऴगियसिंगर (श्री रंगनाथ शठकोप यतीन्द्र महादेशिक)
मार्गळि · विशाखा
दृश्य गणित क्या है?

दृश्य का अर्थ है "जो दिखाई दे" और गणित का अर्थ है "गणना"। दृश्य गणित पंचांग वह है जिसकी बात आप अपनी आँखों से परख सकें। जब वह कहता है कि चंद्रमा किसी नक्षत्र में है, तो रात के आकाश में आप उसे वहीं पाएँगे। जब वह ग्रहण, अमावस्या या पूर्णिमा का समय बताता है, तो आकाश उसी समय वह दृश्य दिखाता है।

हमारा पंचांग इसी सिद्धांत पर चलता है। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध JPL ग्रह सारणी (एफ़ेमेरिस) के आधार पर आधुनिक खगोल विज्ञान से सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति की गणना करता है (यह साइट नासा या JPL से संबद्ध नहीं है और न ही उनके द्वारा समर्थित है), ताकि हर तिथि, नक्षत्र और पर्व का दिन स्वयं आकाश से मेल खाए।

सदियों से बड़े यत्न से संजोए गए पारंपरिक वाक्य पंचांग अपनी प्राचीन पद्धति का पालन करते हैं। इसलिए कभी-कभी यहाँ की कोई तिथि वाक्य पंचांग से एक दिन भिन्न हो सकती है। ऐसे हर अवसर पर कृपया अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें।

परिचय

अहोबिल मठ तिरुनक्षत्रम

श्री अहोबिल मठ दक्षिण भारत के महान श्रीवैष्णव मठों में से एक है। परंपरा के अनुसार इसकी स्थापना लगभग 1398 में आज के आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों में स्थित अहोबिलम में हुई, जहाँ स्वयं भगवान लक्ष्मी नृसिंह ने युवा विद्वान श्रीनिवासाचार्य को संन्यास की दीक्षा दी और वे मठ के प्रथम जीयर श्रीवण् शठकोप स्वामी बने।

मठ के जीयरों को अहोबिलम के भगवान के नाम पर प्रेम से अऴगियसिंगर, "सुंदर सिंह", कहा जाता है। प्रत्येक अऴगियसिंगर मठ के अपने आराध्य श्री मालोल नृसिंह की आराधना करते हैं और संचार में उन्हें स्थान से स्थान ले जाते हुए विशिष्टाद्वैत और श्रीवैष्णव जीवन पद्धति का उपदेश देते हैं। यह परंपरा छह शताब्दियों से अधिक समय से बिना टूटे चली आ रही है; वर्तमान अऴगियसिंगर 46वें हैं, श्रीवण् शठकोप श्री रंगनाथ यतीन्द्र महादेशिक।

मठ प्रत्येक अऴगियसिंगर को उनके तिरुनक्षत्रम पर, अर्थात उनके जन्म के तमिल मास में उनके जन्म नक्षत्र के दिन, मठ और उसकी शाखाओं में विशेष पूजा, दिव्य प्रबंधम के पाठ और नैवेद्य के साथ स्मरण करता है।

ऊपर की सूची में आपके नगर के लिए इस वर्ष के सभी अऴगियसिंगर तिरुनक्षत्रम मास के क्रम से दिए गए हैं।

लक्ष्मीनाथसमारम्भां नाथयामुनमध्यमाम् ।
अस्मदाचार्यपर्यन्तां वन्दे गुरुपरंपराम् ॥
"मैं हमारे आचार्यों की उस परंपरा को प्रणाम करता हूँ, जो लक्ष्मीनाथ भगवान श्रीमन्नारायण से आरंभ होती है, जिसके मध्य में श्रीमन्नाथमुनि और श्री यामुनाचार्य हैं, और जो हमारे अपने आचार्य तक पहुँचती है।"
गुरु परंपरा तनियन्
केशवार्यकृपापात्रं धीशमादिगुणार्णवम् |
श्री शठारियतीशानं देशिकेन्द्रमहं भजे ||

प्रपद्ये निरवद्यानां निषद्यां गुणसम्पदाम् |
शरणं भवभीतानां शठकोप मुनीश्वरम् ||
"मैं महान आचार्य श्री शठकोप यति की उपासना करता हूँ, जो केशवार्य की कृपा के पात्र और ज्ञान, संयम तथा समस्त सद्गुणों के सागर हैं। मैं शठकोप मुनि की शरण लेता हूँ, जो निर्दोष गुणों के धाम और जन्म-मरण के चक्र से भयभीत जनों के आश्रय हैं।"
श्रीवण् शठकोप स्वामी (आदिवण् शठकोप यतीन्द्र महादेशिकन्), संस्थापक और प्रथम अऴगियसिंगर, का तनियन् (श्री अहोबिल मठ के श्री सन्निधि तनियन् में छपे पाठ के अनुसार)
परंपरा और विधि
🦁
अऴगियसिंगर
"सुंदर सिंह": अहोबिलम के भगवान नृसिंह के नाम पर श्री अहोबिल मठ के प्रत्येक जीयर की उपाधि।
🛕
श्री मालोल नृसिंह
मठ के अपने आराध्य, जिनकी प्रत्येक अऴगियसिंगर आराधना करते हैं और संचार में साथ ले जाते हैं।
📿
46 अऴगियसिंगर
श्रीवण् शठकोप स्वामी (लगभग 1398) से वर्तमान 46वें तक जीयरों की अटूट परंपरा।
🙏
तिरुनक्षत्रम
प्रत्येक अऴगियसिंगर का स्मरण उनके तमिल मास में उनके जन्म नक्षत्र पर किया जाता है।
शास्त्री जी से पूछें
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