Ashwayuja Bahula Tadiya: the moonrise vratam of Telugu women
अट्लतद्दि (అట్లతద్ది), जिसे अट्ल तद्दि भी कहते हैं, आश्वयुज बहुल तदिया को पड़ता है, यानी आश्वयुज के कृष्ण पक्ष का तीसरा दिन। यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की स्त्रियों के सबसे प्रिय व्रतों में से एक है।
भोर से बहुत पहले लड़कियाँ और स्त्रियाँ गोंगूरा पचड़ी और दही के साथ चावल का भोजन करती हैं, और फिर दिन भर उपवास रखती हैं। सुबह का समय खेल का होता है: पेड़ों पर झूले (उय्याला) डाले जाते हैं, और वे झूलते हुए तथा गलियों में खेल खेलते हुए "अट्ल तद्दोय्, आरट्लोय्, मुद्दपप्पोय्" गाती हैं।
संध्या को गौरी देवी की पूजा होती है, और उन्हें अट्लु (डोसे) अर्पित किए जाते हैं तथा सुहागिनों को वायनम् के रूप में दिए जाते हैं। चंद्रोदय होने पर स्त्रियाँ चंद्रमा के दर्शन करती हैं, उसे अर्घ्य देती हैं और उपवास तोड़ती हैं। सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं, और युवतियाँ अच्छे पति के लिए।
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