ॐ
बैसाखी (वैशाखी) 1934: डिब्रूगढ़, असम
वैसाख 1: पंजाब का सौर नववर्ष और फसल का पर्व
📍
डिब्रूगढ़, असम, भारत
बैसाखी (वैशाखी) · 1934
📍 डिब्रूगढ़, असम, भारत
अप्रैल 13, 1934
वैसाख 1: पंजाब का सौर नववर्ष और फसल का पर्व
समय · डिब्रूगढ़
सूर्योदय
04:50:03 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
05:32:38 अपराह्न
इस दिन का पंचांग · डिब्रूगढ़
🌓 तिथि
चतुर्दशी
⭐ नक्षत्र
उत्तराभाद्रपद
🔯 योग
ऐन्द्र
🌅 सूर्योदय
04:50:03 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
05:32:38 अपराह्न
परिचय
बैसाखी (वैशाखी)
बैसाखी (वैशाखी, ਵਿਸਾਖੀ) सौर मास वैशाख का पहला दिन है, जो पारंपरिक पंजाबी सौर पंचांग का नववर्ष है। यह रबी की फसल की कटाई का पर्व है, और पूरे पंजाब और हरियाणा में किसान वर्ष की उपज के लिए आभार प्रकट करते हैं।
सिखों के लिए यह दिन खालसा साजना दिवस भी है: 1699 की वैशाखी को आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना की थी। गुरुद्वारों में कीर्तन और शोभायात्राएँ (नगर कीर्तन) होती हैं, और अनेक परिवार नदियों में पवित्र स्नान करते हैं।
मेले, भंगड़ा और गिद्दा से दिन भर उत्सव रहता है, और परिवार तथा पड़ोसियों के साथ नए वस्त्र और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं।
परंपरा और विधि
फसल
पूरे पंजाब और हरियाणा में रबी की फसल के लिए आभार।
खालसा साजना दिवस
1699 में आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा की स्थापना।
भंगड़ा और गिद्दा
लोकनृत्य और मेलों के साथ नववर्ष का उत्सव।
शास्त्री जी से पूछें
पंचांग खोलें
दैनिक पंचांग
ओडिशा, उसी दिन
महाविषुव संक्रांति (पणा संक्रांति)
बंगाल
पोइला बोइशाख
असम
रोंगाली बिहू
पंचांग खोलें
डिब्रूगढ़ का दैनिक पंचांग
अन्वेषण करें
सभी लेख
आज का पंचांग, त्योहार, मुहूर्त और बहुत कुछ देखें
🕉 पंचांग चैट खोलें