Chaitra Purnima: the Karaga of Draupadi through old Bengaluru
बेंगलुरु करगा (ಬೆಂಗಳೂರು ಕರಗ) नगर का सबसे प्राचीन उत्सव है, जिसे तिगळ समुदाय तिगळरपेटे के श्री धर्मराय स्वामी मंदिर में मनाता है। एक सप्ताह से अधिक चलने वाले अनुष्ठानों के अंत में इसकी महान रात्रि चैत्र पूर्णिमा होती है।
करगा, पवित्र कलश पर मोगरे के फूलों का ऊँचा पिरामिड, आदिशक्ति रूप में द्रौपदी है। देवी के वेश में एक तिगळ पुजारी इसे सिर पर धारण करते हैं और हाथों से छुए बिना ले चलते हैं, और पूरी रात यह पुराने नगर की गलियों में घूमता है, जिसकी रक्षा नंगी तलवारें लिए वीरकुमार करते हैं। मार्ग में यह कॉटनपेट में हज़रत तवक्कल मस्तान की दरगाह पर भी जाता है, यह संबंध नगर पीढ़ियों से निभाता आया है।
लाखों भक्त भोर तक सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं, जब करगा मंदिर लौटता है।
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