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ॐ

धनतेरस 1986

अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा

📍 बेंगलुरु, भारत
धनतेरस · 1986
📍 बेंगलुरु, भारत
अक्तूबर 30, 1986
अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा
दिवाली सप्ताह, दिन प्रतिदिन · बेंगलुरु
🏅
धनतेरस
🗓 अक्तूबर 30, 1986
🔔 धनतेरस, गोवत्स द्वादशी, 🔱 प्रदोष
🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): अक्तूबर/30 06:52:35 PM – अक्तूबर/30 08:21:22 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: वृषभ स्थिर लग्न
अक्तूबर/30 06:52:35 PM
समाप्त अक्तूबर/30 08:21:22 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 29
06:13:30 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 30
06:13:45 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 30
05:53:12 अपराह्न
🌘 त्रयोदशी शुरू
अक्तूबर 30
05:57:30 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 31
06:14:01 पूर्वाह्न
🌘 त्रयोदशी समाप्त
अक्तूबर 31
04:23:31 अपराह्न
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌑
काली चौदस
🗓 अक्तूबर 31, 1986
🔔 हनुमान जयंती, काली चौदस, शुक्र अस्त प्रारंभ, मास शिवरात्रि
🕉 निशीथ काल (काली पूजा): अक्तूबर/31 11:38:51 PM – नवम्बर/1 12:28:17 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
निशीथ काल (काली पूजा)
अक्तूबर/31 11:38:51 PM
समाप्त नवम्बर/1 12:28:17 AM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 30
06:13:45 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 31
06:14:01 पूर्वाह्न
🌘 चतुर्दशी शुरू
अक्तूबर 31
04:23:31 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 31
05:52:50 अपराह्न
🕛 मध्यरात्रि मुहूर्त
अक्तूबर 31
11:38:51 PM – नवम्बर 1, 12:28:17 AM
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 1
06:14:18 पूर्वाह्न
🌑 चतुर्दशी समाप्त
नवम्बर 1
02:12:30 अपराह्न
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🪔
नरक चतुर्दशी
🗓 नवम्बर 1, 1986
🔔 यम दीप दान, नरक चतुर्दशी, दीपावली, अमावस्या तर्पण, अन्वाधान
🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 05:05:41 AM – 06:14:18 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय)
05:05:41 पूर्वाह्न
समाप्त 06:14:18 AM
🌘 चतुर्दशी शुरू
अक्तूबर 31
04:23:31 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
नवम्बर 1
06:14:18 पूर्वाह्न
🌑 चतुर्दशी समाप्त
नवम्बर 1
02:12:30 अपराह्न
🌙 चंद्रोदय
नवम्बर 2
06:03:11 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
नवम्बर 2
06:14:35 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
नवम्बर 2
05:52:09 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 3
06:14:53 पूर्वाह्न
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
✨
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
🗓 नवम्बर 1, 1986
🔔 यम दीप दान, नरक चतुर्दशी, दीपावली, अमावस्या तर्पण, अन्वाधान
🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): नवम्बर/1 06:44:43 PM – नवम्बर/1 08:20:54 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: वृषभ स्थिर लग्न
नवम्बर/1 06:44:43 PM
समाप्त नवम्बर/1 08:20:54 PM
निशीथ काल (मध्यरात्रि)
नवम्बर/1 11:38:48 PM
समाप्त नवम्बर/2 12:28:16 AM
चोपड़ा पूजन (नई बहीखाता)
नवम्बर/1 06:44:43 PM
समाप्त नवम्बर/1 08:20:54 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 31
06:14:01 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
नवम्बर 1
06:14:18 पूर्वाह्न
🌑 अमावस्या शुरू
नवम्बर 1
02:12:30 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
नवम्बर 1
05:52:29 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 2
06:14:35 पूर्वाह्न
🌒 अमावस्या समाप्त
नवम्बर 2
11:32:07 पूर्वाह्न
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकनवम्बर/2 07:18:26 AMनवम्बर/2 09:30:14 AM
कुंभनवम्बर/2 01:31:09 PMनवम्बर/2 03:13:10 PM
वृषभनवम्बर/2 06:40:47 PMनवम्बर/2 08:42:51 PM
चौघड़ियासेतक
चलनवम्बर/2 07:41:47 AMनवम्बर/2 09:08:58 AM
लाभनवम्बर/2 09:08:58 AMनवम्बर/2 10:36:10 AM
अमृतनवम्बर/2 10:36:10 AMनवम्बर/2 12:03:22 PM
शुभनवम्बर/2 01:30:34 PMनवम्बर/2 02:57:45 PM
शुभनवम्बर/2 05:52:09 PMनवम्बर/2 07:24:59 PM
अमृतनवम्बर/2 07:24:59 PMनवम्बर/2 08:57:50 PM
चलनवम्बर/2 08:57:50 PMनवम्बर/2 10:30:40 PM
लाभनवम्बर/3 01:36:21 AMनवम्बर/3 03:09:12 AM
शुभनवम्बर/3 04:42:02 AMनवम्बर/3 06:14:53 AM
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📒
बलि प्रतिपदा
🗓 नवम्बर 2, 1986
🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा, इष्टि
🕉 चल चौघड़िया (मिति मुहूर्त): नवम्बर/2 07:41:47 AM – नवम्बर/2 09:08:58 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकनवम्बर/2 07:18:26 AMनवम्बर/2 09:30:14 AM
कुंभनवम्बर/2 01:31:09 PMनवम्बर/2 03:13:10 PM
वृषभनवम्बर/2 06:40:47 PMनवम्बर/2 08:42:51 PM
चौघड़ियासेतक
चलनवम्बर/2 07:41:47 AMनवम्बर/2 09:08:58 AM
लाभनवम्बर/2 09:08:58 AMनवम्बर/2 10:36:10 AM
अमृतनवम्बर/2 10:36:10 AMनवम्बर/2 12:03:22 PM
शुभनवम्बर/2 01:30:34 PMनवम्बर/2 02:57:45 PM
शुभनवम्बर/2 05:52:09 PMनवम्बर/2 07:24:59 PM
अमृतनवम्बर/2 07:24:59 PMनवम्बर/2 08:57:50 PM
चलनवम्बर/2 08:57:50 PMनवम्बर/2 10:30:40 PM
लाभनवम्बर/3 01:36:21 AMनवम्बर/3 03:09:12 AM
शुभनवम्बर/3 04:42:02 AMनवम्बर/3 06:14:53 AM
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👫
यम द्वितीया / भैया दूज
🗓 नवम्बर 3, 1986
🔔 गुजराती नव वर्ष, यम द्वितीया / भाई दूज, विंछुड़ो शुरू 10:35:18 AM, कार्तिक सोमवार (C)
🕉 अपराह्न काल: नवम्बर/3 01:13:03 PM – नवम्बर/3 03:32:26 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अपराह्न काल
नवम्बर/3 01:13:03 PM
समाप्त नवम्बर/3 03:32:26 PM
चौघड़ियासेतक
अमृतनवम्बर/3 06:14:53 AMनवम्बर/3 07:42:00 AM
शुभनवम्बर/3 09:09:07 AMनवम्बर/3 10:36:14 AM
लाभनवम्बर/3 03:32:26 PMनवम्बर/3 04:24:43 PM
अमृतनवम्बर/3 04:24:43 PMनवम्बर/3 05:51:50 PM
चलनवम्बर/3 05:51:50 PMनवम्बर/3 07:24:45 PM
लाभनवम्बर/3 10:30:35 PMनवम्बर/4 12:03:30 AM
शुभनवम्बर/4 01:36:26 AMनवम्बर/4 03:09:21 AM
अमृतनवम्बर/4 03:09:21 AMनवम्बर/4 04:42:16 AM
चलनवम्बर/4 04:42:16 AMनवम्बर/4 06:15:11 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 29
06:13:30 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 30
06:13:45 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 30
05:53:12 अपराह्न
🌘 तिथि शुरू
अक्तूबर 30
05:57:30 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 31
06:14:01 पूर्वाह्न
🌒 तिथि समाप्त
अक्तूबर 31
04:23:31 अपराह्न
परिचय

धनतेरस

धनतेरस, धन और तेरस (तेरहवीं तिथि) से मिलकर बना है, और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है (दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित अमांत मास गणना के अनुसार आश्विन कृष्ण त्रयोदशी, और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) और यह पाँच दिवसीय दिवाली उत्सव के आरंभ का प्रतीक है। यह एक साथ भगवान धन्वंतरि की जयंती (जन्मदिवस) भी है, देवताओं के वैद्य जो समुद्र मंथन से अमृत का कलश और आयुर्वेद का ज्ञान लेकर प्रकट हुए थे।

इस संध्या, लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (संध्या के धुंधलके) में की जाती है: जब माना जाता है कि देवी समृद्ध और जगमगाते घरों में पधारती हैं। उनका स्वागत करने के लिए घरों की गहन सफ़ाई की जाती है और दीयों तथा रंगोली से सजाया जाता है। प्रदोष काल का समय (सूर्यास्त के बाद परंतु रात्रि होने से पहले) अत्यंत महत्वपूर्ण है: माना जाता है कि इसी अवधि में पूजा करने से पूरे वर्ष के लिए लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

धनतेरस भारत में सोने-चाँदी की खरीद का सबसे बड़ा दिन है। इस दिन बहुमूल्य धातुएँ, ताँबे के बर्तन, या नए पात्र खरीदना निरंतर समृद्धि लाने वाला माना जाता है। यह परंपरा एक कथा से जुड़ी है जिसमें एक युवा राजा का विवाह के चौथे दिन मरना निश्चित था: उसकी वधू ने शयनकक्ष के द्वार के चारों ओर सोना-चाँदी बिछाकर और रातभर गीत गाकर मृत्यु को मात दे दी, जिससे यमराज बिना प्रवेश किए ही लौट गए।

परंपरा और विधि
🏅
धनतेरस की खरीदारी
धनतेरस पर सोना, चाँदी, पीतल, या ताँबे की वस्तुएँ खरीदना सबसे लोकप्रिय आधुनिक परंपरा है। एक चाँदी का सिक्का या छोटा बर्तन खरीदना भी लक्ष्मी का आशीर्वाद आमंत्रित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
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धन्वंतरि जयंती
भगवान धन्वंतरि (चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता) का इस दिन सम्मान किया जाता है। डॉक्टर, फार्मासिस्ट, और आयुर्वेद वैद्य ब्रह्मांड के दिव्य वैद्य के रूप में उनकी पूजा करते हैं।
🕯️
प्रदोष काल पूजा
लक्ष्मी पूजा का समय प्रदोष काल पर रखना अनिवार्य है: सूर्यास्त के बाद की संध्या धुंधलके की अवधि। इस अवधि में देवी पृथ्वी पर जगमगाते, स्वच्छ, और स्वागतयोग्य घरों की तलाश में विचरण करती हैं।
💀
यम दीपम
धनतेरस की रात, असामयिक मृत्यु को दूर रखने के लिए घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) की ओर मुख करके एक दीपक रखा जाता है। परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा के लिए यमराज को एक छोटी प्रार्थना अर्पित की जाती है।
🎁
उपहार और नई वस्तुएँ
परिवार परंपरागत रूप से धनतेरस पर नए बर्तन, उपकरण, या वाहन खरीदते हैं। मूल सिद्धांत यह है: आज जो भी प्राप्त किया जाता है, वह बढ़ता है और घर में बना रहता है, ऐसा माना जाता है।
🌺
रंगोली और दीये
दीयों (तेल के दीपकों) की पंक्तियाँ दहलीज़ों, खिड़कियों, और छतों पर सजाई जाती हैं। प्रवेश द्वार पर सोने और लाल रंग में भव्य रंगोली बनाई जाती है: लक्ष्मी को भीतर आने का एक दृश्यमान निमंत्रण।
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