पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण अमावस्या और अमावस्यांत आश्विन अमावस्या: दीपों का पर्व
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | अक्तूबर/24 09:27:06 AM | अक्तूबर/24 11:52:09 AM |
| कुंभ | अक्तूबर/24 03:20:39 PM | अक्तूबर/24 04:33:06 PM |
| वृषभ | अक्तूबर/24 07:06:20 PM | अक्तूबर/24 08:56:05 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | अक्तूबर/24 07:19:11 AM | अक्तूबर/24 08:39:33 AM |
| चल | अक्तूबर/24 03:21:24 PM | अक्तूबर/24 04:41:47 PM |
| लाभ | अक्तूबर/24 04:41:47 PM | अक्तूबर/24 06:02:09 PM |
| शुभ | अक्तूबर/24 07:41:55 PM | अक्तूबर/24 09:21:41 PM |
| अमृत | अक्तूबर/24 09:21:41 PM | अक्तूबर/24 11:01:28 PM |
| चल | अक्तूबर/24 11:01:28 PM | अक्तूबर/25 12:41:14 AM |
| लाभ | अक्तूबर/25 04:00:46 AM | अक्तूबर/25 05:40:32 AM |
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | अक्तूबर/26 09:19:14 AM | अक्तूबर/26 11:44:17 AM |
| कुंभ | अक्तूबर/26 03:12:47 PM | अक्तूबर/26 04:25:14 PM |
| वृषभ | अक्तूबर/26 06:58:28 PM | अक्तूबर/26 08:48:14 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| चल | अक्तूबर/26 07:21:27 AM | अक्तूबर/26 08:41:12 AM |
| अमृत | अक्तूबर/26 10:11:34 AM | अक्तूबर/26 11:20:41 AM |
| शुभ | अक्तूबर/26 12:40:26 PM | अक्तूबर/26 01:01:42 PM |
| शुभ | अक्तूबर/26 01:44:14 PM | अक्तूबर/26 02:00:11 PM |
| चल | अक्तूबर/26 04:39:41 PM | अक्तूबर/26 05:59:25 PM |
| लाभ | अक्तूबर/26 09:20:13 PM | अक्तूबर/26 11:00:37 PM |
| शुभ | अक्तूबर/27 12:41:00 AM | अक्तूबर/27 02:21:24 AM |
| अमृत | अक्तूबर/27 02:21:24 AM | अक्तूबर/27 04:01:48 AM |
| चल | अक्तूबर/27 04:01:48 AM | अक्तूबर/27 05:42:12 AM |
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | अक्तूबर/26 09:19:14 AM | अक्तूबर/26 11:44:17 AM |
| कुंभ | अक्तूबर/26 03:12:47 PM | अक्तूबर/26 04:25:14 PM |
| वृषभ | अक्तूबर/26 06:58:28 PM | अक्तूबर/26 08:48:14 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| चल | अक्तूबर/26 07:21:27 AM | अक्तूबर/26 08:41:12 AM |
| अमृत | अक्तूबर/26 10:11:34 AM | अक्तूबर/26 11:20:41 AM |
| शुभ | अक्तूबर/26 12:40:26 PM | अक्तूबर/26 01:01:42 PM |
| शुभ | अक्तूबर/26 01:44:14 PM | अक्तूबर/26 02:00:11 PM |
| चल | अक्तूबर/26 04:39:41 PM | अक्तूबर/26 05:59:25 PM |
| लाभ | अक्तूबर/26 09:20:13 PM | अक्तूबर/26 11:00:37 PM |
| शुभ | अक्तूबर/27 12:41:00 AM | अक्तूबर/27 02:21:24 AM |
| अमृत | अक्तूबर/27 02:21:24 AM | अक्तूबर/27 04:01:48 AM |
| चल | अक्तूबर/27 04:01:48 AM | अक्तूबर/27 05:42:12 AM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| शुभ | अक्तूबर/27 08:47:19 AM | अक्तूबर/27 10:01:28 AM |
| चल | अक्तूबर/27 12:40:20 PM | अक्तूबर/27 01:59:47 PM |
| अमृत | अक्तूबर/27 03:19:13 PM | अक्तूबर/27 04:38:39 PM |
| लाभ | अक्तूबर/27 05:58:05 PM | अक्तूबर/27 07:38:48 PM |
| शुभ | अक्तूबर/27 09:19:30 PM | अक्तूबर/27 11:00:12 PM |
| अमृत | अक्तूबर/27 11:00:12 PM | अक्तूबर/28 12:40:55 AM |
| चल | अक्तूबर/28 12:40:55 AM | अक्तूबर/28 02:21:37 AM |
| लाभ | अक्तूबर/28 05:43:02 AM | अक्तूबर/28 07:23:44 AM |
दिवाली (दीपावली, "दीपों की पंक्ति") हिंदू जगत का सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है, जो अमावस्या यानी अमावस की रात को पड़ता है: दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित अमांत मास गणना के अनुसार आश्विन अमावस्या, और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या। एक ही रात में अमावस्या का अंधकार लाखों मिट्टी के दीयों, बिजली की रोशनी, आतिशबाज़ी, और हर घर के देवी लक्ष्मी को अपने जीवन में आमंत्रित करने के सामूहिक संकल्प से पूरी तरह उलट जाता है।
इस पर्व की सबसे प्रचलित कथा है 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी और रावण पर उनकी विजय। अयोध्यावासियों ने अमावस्या के अंधकार में उनका स्वागत करने के लिए दीपों की पंक्तियाँ (दीपावली) जलाईं। दक्षिण भारत में यह दिन कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध (अंधकार के असुर) और उसके बंदीगृह से 16,100 स्त्रियों की मुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस रात काली पूजा की जाती है।
इस पर्व का मुख्य अनुष्ठान लक्ष्मी पूजा है, जो परंपरा के अनुसार प्रदोष काल (संध्या का धुंधलका) या निशीथ काल (मध्यरात्रि) में की जाती है। धन और शुभता की देवी को एक तनिक भी मैल रहित, दीपों से जगमगाते घर में आमंत्रित किया जाता है। व्यापारी परिवारों में नए बही-खाते, सोना, चाँदी, और उपहार उनकी प्रतिमा के सामने रखे जाते हैं। पूजा के बाद प्रसाद वितरण, आतिशबाज़ी, और पड़ोसियों के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
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