दिवाली 2012
पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण अमावस्या और अमावस्यांत आश्विन अमावस्या: दीपों का पर्व
धनतेरस🗓 नवम्बर 11, 2012🔔 हनुमान जयंती, धनतेरस, यम दीप दान, काली चौदस, 🔱 प्रदोष, मास शिवरात्रि🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): नवम्बर/11 04:58:16 PM – नवम्बर/11 06:50:46 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नवम्बर/11 06:46:15 AM | नवम्बर/11 09:07:47 AM |
| कुंभ | नवम्बर/11 12:48:13 PM | नवम्बर/11 02:09:44 PM |
| वृषभ | नवम्बर/11 04:58:16 PM | नवम्बर/11 06:50:46 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| चल | नवम्बर/11 07:40:18 AM | नवम्बर/11 08:58:39 AM |
| लाभ | नवम्बर/11 08:58:39 AM | नवम्बर/11 10:17:00 AM |
| अमृत | नवम्बर/11 10:17:00 AM | नवम्बर/11 11:35:21 AM |
| शुभ | नवम्बर/11 12:53:42 PM | नवम्बर/11 02:12:02 PM |
| शुभ | नवम्बर/11 04:48:44 PM | नवम्बर/11 06:30:30 PM |
| अमृत | नवम्बर/11 06:30:30 PM | नवम्बर/11 08:12:17 PM |
| चल | नवम्बर/11 08:12:17 PM | नवम्बर/11 09:54:03 PM |
| लाभ | नवम्बर/12 01:17:35 AM | नवम्बर/12 02:59:22 AM |
| शुभ | नवम्बर/12 04:41:08 AM | नवम्बर/12 06:22:54 AM |
काली चौदस🗓 नवम्बर 11, 2012🔔 हनुमान जयंती, धनतेरस, यम दीप दान, काली चौदस, 🔱 प्रदोष, मास शिवरात्रि🕉 निशीथ काल (काली पूजा): नवम्बर/11 11:08:41 PM – नवम्बर/12 12:02:57 AM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
नरक चतुर्दशी🗓 नवम्बर 12, 2012🔔 नरक चतुर्दशी, दीपावली🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 04:53:57 AM – 06:22:54 AM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)🗓 नवम्बर 12, 2012🔔 नरक चतुर्दशी, दीपावली🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): नवम्बर/12 04:54:20 PM – नवम्बर/12 06:46:50 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नवम्बर/13 06:38:23 AM | नवम्बर/13 08:59:55 AM |
| कुंभ | नवम्बर/13 12:40:21 PM | नवम्बर/13 02:01:52 PM |
| वृषभ | नवम्बर/13 04:50:24 PM | नवम्बर/13 06:42:54 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | नवम्बर/13 10:17:41 AM | नवम्बर/13 11:35:37 AM |
| लाभ | नवम्बर/13 06:29:34 PM | नवम्बर/13 08:11:45 PM |
| शुभ | नवम्बर/13 09:53:55 PM | नवम्बर/13 11:36:06 PM |
| अमृत | नवम्बर/13 11:36:06 PM | नवम्बर/14 01:18:16 AM |
| चल | नवम्बर/14 01:18:16 AM | नवम्बर/14 03:00:27 AM |
बलि प्रतिपदा🗓 नवम्बर 13, 2012🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा, विंछुड़ो शुरू 05:26:43 PM, अमावस्या तर्पण, भौमवती अमावस्या, अन्वाधान🕉 लाभ चौघड़िया (मिति मुहूर्त): नवम्बर/13 10:17:41 AM – नवम्बर/13 11:35:37 AM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नवम्बर/13 06:38:23 AM | नवम्बर/13 08:59:55 AM |
| कुंभ | नवम्बर/13 12:40:21 PM | नवम्बर/13 02:01:52 PM |
| वृषभ | नवम्बर/13 04:50:24 PM | नवम्बर/13 06:42:54 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | नवम्बर/13 10:17:41 AM | नवम्बर/13 11:35:37 AM |
| लाभ | नवम्बर/13 06:29:34 PM | नवम्बर/13 08:11:45 PM |
| शुभ | नवम्बर/13 09:53:55 PM | नवम्बर/13 11:36:06 PM |
| अमृत | नवम्बर/13 11:36:06 PM | नवम्बर/14 01:18:16 AM |
| चल | नवम्बर/14 01:18:16 AM | नवम्बर/14 03:00:27 AM |
यम द्वितीया / भैया दूज🗓 नवम्बर 14, 2012🔔 गुजराती नव वर्ष, यम द्वितीया / भाई दूज, इष्टि🕉 अपराह्न काल: नवम्बर/14 12:37:59 PM – नवम्बर/14 02:42:23 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | नवम्बर/14 06:24:48 AM | नवम्बर/14 07:42:33 AM |
| चल | नवम्बर/14 02:11:17 PM | नवम्बर/14 03:29:02 PM |
| लाभ | नवम्बर/14 03:29:02 PM | नवम्बर/14 04:46:46 PM |
| शुभ | नवम्बर/14 06:29:09 PM | नवम्बर/14 08:11:31 PM |
| अमृत | नवम्बर/14 08:11:31 PM | नवम्बर/14 09:53:53 PM |
| चल | नवम्बर/14 09:53:53 PM | नवम्बर/14 11:36:16 PM |
| लाभ | नवम्बर/15 03:01:00 AM | नवम्बर/15 04:43:22 AM |
दिवाली
दिवाली (दीपावली, "दीपों की पंक्ति") हिंदू जगत का सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है, जो अमावस्या यानी अमावस की रात को पड़ता है: दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित अमांत मास गणना के अनुसार आश्विन अमावस्या, और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या। एक ही रात में अमावस्या का अंधकार लाखों मिट्टी के दीयों, बिजली की रोशनी, आतिशबाज़ी, और हर घर के देवी लक्ष्मी को अपने जीवन में आमंत्रित करने के सामूहिक संकल्प से पूरी तरह उलट जाता है।
इस पर्व की सबसे प्रचलित कथा है 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी और रावण पर उनकी विजय। अयोध्यावासियों ने अमावस्या के अंधकार में उनका स्वागत करने के लिए दीपों की पंक्तियाँ (दीपावली) जलाईं। दक्षिण भारत में यह दिन कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध (अंधकार के असुर) और उसके बंदीगृह से 16,100 स्त्रियों की मुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस रात काली पूजा की जाती है।
इस पर्व का मुख्य अनुष्ठान लक्ष्मी पूजा है, जो परंपरा के अनुसार प्रदोष काल (संध्या का धुंधलका) या निशीथ काल (मध्यरात्रि) में की जाती है। धन और शुभता की देवी को एक तनिक भी मैल रहित, दीपों से जगमगाते घर में आमंत्रित किया जाता है। व्यापारी परिवारों में नए बही-खाते, सोना, चाँदी, और उपहार उनकी प्रतिमा के सामने रखे जाते हैं। पूजा के बाद प्रसाद वितरण, आतिशबाज़ी, और पड़ोसियों के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
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