पौर्णिमांत कार्तिक कृष्ण अमावस्या आणि अमावस्यांत आश्विन अमावस्या: दिव्यांचा सण
| स्थिर लग्न | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नोव्हेंबर/11 06:22:46 AM | नोव्हेंबर/11 08:38:19 AM |
| कुंभ | नोव्हेंबर/11 12:29:01 PM | नोव्हेंबर/11 02:02:07 PM |
| वृषभ | नोव्हेंबर/11 05:14:40 PM | नोव्हेंबर/11 07:13:53 PM |
| चौघडिया | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चल | नोव्हेंबर/11 05:47:34 AM | नोव्हेंबर/11 07:10:49 AM |
| अमृत | नोव्हेंबर/11 08:45:10 AM | नोव्हेंबर/11 09:57:19 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/11 11:20:34 AM | नोव्हेंबर/11 11:42:46 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/11 12:27:11 PM | नोव्हेंबर/11 12:43:50 PM |
| चल | नोव्हेंबर/11 03:30:20 PM | नोव्हेंबर/11 04:53:35 PM |
| लाभ | नोव्हेंबर/11 08:07:14 PM | नोव्हेंबर/11 09:44:03 PM |
| शुभ | नोव्हेंबर/11 11:20:53 PM | नोव्हेंबर/12 12:57:42 AM |
| अमृत | नोव्हेंबर/12 12:57:42 AM | नोव्हेंबर/12 02:34:32 AM |
| चल | नोव्हेंबर/12 02:34:32 AM | नोव्हेंबर/12 04:11:21 AM |
| स्थिर लग्न | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नोव्हेंबर/13 06:14:54 AM | नोव्हेंबर/13 08:30:27 AM |
| कुंभ | नोव्हेंबर/13 12:21:10 PM | नोव्हेंबर/13 01:54:15 PM |
| वृषभ | नोव्हेंबर/13 05:06:48 PM | नोव्हेंबर/13 07:06:01 PM |
| चौघडिया | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चल | नोव्हेंबर/13 07:11:48 AM | नोव्हेंबर/13 08:34:48 AM |
| लाभ | नोव्हेंबर/13 08:34:48 AM | नोव्हेंबर/13 09:57:48 AM |
| अमृत | नोव्हेंबर/13 09:57:48 AM | नोव्हेंबर/13 11:20:49 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/13 12:43:49 PM | नोव्हेंबर/13 02:06:49 PM |
| शुभ | नोव्हेंबर/13 04:52:49 PM | नोव्हेंबर/13 06:29:54 PM |
| अमृत | नोव्हेंबर/13 06:29:54 PM | नोव्हेंबर/13 08:06:58 PM |
| चल | नोव्हेंबर/13 08:06:58 PM | नोव्हेंबर/13 09:44:03 PM |
| लाभ | नोव्हेंबर/14 12:58:12 AM | नोव्हेंबर/14 02:35:16 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/14 04:12:21 AM | नोव्हेंबर/14 05:49:25 AM |
| स्थिर लग्न | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नोव्हेंबर/14 06:10:58 AM | नोव्हेंबर/14 08:26:31 AM |
| कुंभ | नोव्हेंबर/14 12:17:14 PM | नोव्हेंबर/14 01:50:19 PM |
| वृषभ | नोव्हेंबर/14 05:02:52 PM | नोव्हेंबर/14 07:02:05 PM |
| चौघडिया | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | नोव्हेंबर/14 05:49:25 AM | नोव्हेंबर/14 07:12:18 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/14 08:35:11 AM | नोव्हेंबर/14 09:58:04 AM |
| लाभ | नोव्हेंबर/14 02:39:52 PM | नोव्हेंबर/14 03:29:36 PM |
| अमृत | नोव्हेंबर/14 03:29:36 PM | नोव्हेंबर/14 04:52:29 PM |
| चल | नोव्हेंबर/14 04:52:29 PM | नोव्हेंबर/14 06:29:40 PM |
| लाभ | नोव्हेंबर/14 09:44:04 PM | नोव्हेंबर/14 11:21:16 PM |
| शुभ | नोव्हेंबर/15 12:58:27 AM | नोव्हेंबर/15 02:35:39 AM |
| अमृत | नोव्हेंबर/15 02:35:39 AM | नोव्हेंबर/15 04:12:51 AM |
| चल | नोव्हेंबर/15 04:12:51 AM | नोव्हेंबर/15 05:50:03 AM |
| चौघडिया | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | नोव्हेंबर/14 05:49:25 AM | नोव्हेंबर/14 07:12:18 AM |
| शुभ | नोव्हेंबर/14 08:35:11 AM | नोव्हेंबर/14 09:58:04 AM |
| लाभ | नोव्हेंबर/14 02:39:52 PM | नोव्हेंबर/14 03:29:36 PM |
| अमृत | नोव्हेंबर/14 03:29:36 PM | नोव्हेंबर/14 04:52:29 PM |
| चल | नोव्हेंबर/14 04:52:29 PM | नोव्हेंबर/14 06:29:40 PM |
| लाभ | नोव्हेंबर/14 09:44:04 PM | नोव्हेंबर/14 11:21:16 PM |
| शुभ | नोव्हेंबर/15 12:58:27 AM | नोव्हेंबर/15 02:35:39 AM |
| अमृत | नोव्हेंबर/15 02:35:39 AM | नोव्हेंबर/15 04:12:51 AM |
| चल | नोव्हेंबर/15 04:12:51 AM | नोव्हेंबर/15 05:50:03 AM |
दिवाळी (दीपावली, "दिव्यांची रांग") हा हिंदू धर्मातील सर्वाधिक प्रमाणात साजरा होणारा सण आहे. हा सण अमावस्येला येतो. दक्षिण आणि पश्चिम भारतात रूढ असलेल्या अमांत महिना पद्धतीनुसार ही आश्विन अमावस्या असते, तर उत्तर भारतात रूढ असलेल्या पौर्णिमांत पद्धतीनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या असते. एका रात्रीसाठी लाखो मातीच्या पणत्या, विद्युत रोषणाई, फटाके आणि प्रत्येक घराने देवी लक्ष्मीला आपल्या जीवनात आमंत्रित करण्याचा केलेला सामूहिक संकल्प, यांमुळे अमावस्येचा अंधार पालटून जातो.
या सणाची सर्वात व्यापक कथा म्हणजे चौदा वर्षांच्या वनवासानंतर भगवान श्रीरामांचे अयोध्येत झालेले पुनरागमन आणि रावणावरील त्यांचा विजय. अयोध्येतील नागरिकांनी अमावस्येच्या अंधारात त्यांच्या स्वागतासाठी दिव्यांच्या रांगा (दीपावली) लावल्या. दक्षिण भारतात या दिवशी श्रीकृष्णाने नरकासुराचा (अंधाराच्या राक्षसाचा) केलेला पराभव आणि त्याने बंदिवासात असलेल्या सोळा हजार शंभर स्त्रियांची केलेली मुक्तता स्मरली जाते. पश्चिम बंगाल आणि ओडिशामध्ये या रात्री काली पूजा केली जाते.
या सणातील मुख्य विधी म्हणजे लक्ष्मी पूजा, जी परंपरेनुसार प्रदोष काळात (संध्याकाळच्या संधिप्रकाशात) किंवा निशीथ काळात (मध्यरात्री) केली जाते. संपत्ती आणि मांगल्याची देवता असलेल्या लक्ष्मीला अत्यंत स्वच्छ आणि दिव्यांनी उजळलेल्या घरात आमंत्रित केले जाते. व्यापारी कुटुंबांमध्ये नवीन हिशेबाच्या वह्या, सोने, चांदी आणि भेटवस्तू तिच्या मूर्तीसमोर ठेवल्या जातात. पूजेनंतर प्रसाद, फटाके आणि शेजाऱ्यांसोबत मिठाईची देवाणघेवाण होते.
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