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ॐ

दोल यात्रा 1946

फाल्गुन पूर्णिमा: झूले पर राधा-कृष्ण, और श्री चैतन्य का जन्म

📍 बेंगलुरु, भारत
दोल यात्रा · 1946
📍 बेंगलुरु, भारत
रविवार, मार्च 17, 1946
फाल्गुन पूर्णिमा: झूले पर राधा-कृष्ण, और श्री चैतन्य का जन्म
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:27:18 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:29:30 अपराह्न
परिचय

दोल यात्रा

दोल यात्रा (দোলযাত্রা), या दोल पूर्णिमा, फाल्गुन की पूर्णिमा है, बंगाल का रंगों का उत्सव। राधा और कृष्ण की प्रतिमाओं को सजे हुए झूले (दोल) पर विराजमान कर अबीर लगाया जाता है, और शोभायात्रा में ले जाया जाता है, जबकि भक्त गाते हैं और रंगीन गुलाल से खेलते हैं।

यही पूर्णिमा गौर पूर्णिमा है, श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिवस, जिनका जन्म 1486 में नवद्वीप में हुआ और जिन्होंने बंगाल को पवित्र नाम के कीर्तन से भर दिया। मायापुर और नवद्वीप में दिन भर कीर्तन के साथ उत्सव मनाया जाता है।

शांतिनिकेतन में यह दिन बसंत उत्सव है, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा आरंभ किया गया वसंत का उत्सव, जिसमें गीत, नृत्य और रंग होते हैं।

परंपरा और विधि
🎨
अबीर
झूले पर विराजमान राधा और कृष्ण को रंगीन गुलाल लगाया जाता है।
📿
गौर पूर्णिमा
श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म इसी पूर्णिमा को नवद्वीप में हुआ था।
🌸
बसंत उत्सव
शांतिनिकेतन गीतों और नृत्यों के साथ वसंत का स्वागत करता है।
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