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ॐ

गणगौर 1957: अहमदाबाद, गुजरात

चैत्र शुक्ल तृतीया: गौरी और ईसर का पर्व

📍 अहमदाबाद, गुजरात, भारत
गणगौर · 1957
📍 अहमदाबाद, गुजरात, भारत
अप्रैल 3, 1957
चैत्र शुक्ल तृतीया: गौरी और ईसर का पर्व
समय · अहमदाबाद
सूर्योदय
06:31:31 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:54:46 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
अप्रैल 2
06:32:28 पूर्वाह्न
🌺 तृतीया शुरू
अप्रैल 2
04:59:04 अपराह्न
🌅 सूर्योदय
अप्रैल 3
06:31:31 पूर्वाह्न
🌺 तृतीया समाप्त
अप्रैल 3
05:27:52 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
अप्रैल 3
06:54:46 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अप्रैल 4
06:30:33 पूर्वाह्न
इस दिन का पंचांग · अहमदाबाद
🌓 तिथि
तृतीया
⭐ नक्षत्र
भरणी
🔯 योग
विष्कम्भ
परिचय

गणगौर

गणगौर गौरी (देवी पार्वती) और ईसर (भगवान शिव) का महान उत्सव है, जो चैत्र के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसका नाम शिव के एक नाम गण को गौरी के नाम गौर से जोड़ता है।

पूजा होली के अगले दिन आरंभ होती है और लगभग अठारह दिनों तक चलती है। स्त्रियाँ मिट्टी से गौरी और ईसर की प्रतिमाएँ बनाती हैं, प्रतिदिन प्रातः ताज़ी दूब, फूल और जल अर्पित करती हैं, और गणगौर के गीत गाती हैं। सुहागिनें अपने पतियों की दीर्घायु और सुखी घर के लिए प्रार्थना करती हैं; अविवाहित कन्याएँ शिव जैसे समर्पित पति के लिए प्रार्थना करती हैं। परंपरा पार्वती की शिव को पाने के लिए की गई लंबी तपस्या का, और उनके अपने मायके लौटने का स्मरण करती है, जहाँ से इस दिन उन्हें प्रेमपूर्वक कैलाश विदा किया जाता है।

गणगौर के दिन प्रतिमाओं का शृंगार करके उन्हें शोभायात्रा में किसी सरोवर या कुएँ तक ले जाया जाता है, जहाँ उन्हें विदाई दी जाती है। जयपुर और उदयपुर की शोभायात्राएँ प्रसिद्ध हैं, और घरों में घेवर और अन्य मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।

परंपरा और विधि
🪔
अठारह दिनों की पूजा
होली के अगले दिन से स्त्रियाँ प्रतिदिन प्रातः गौरी और ईसर की मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं।
💍
सुखी दांपत्य के लिए
सुहागिनें अपने पतियों के लिए प्रार्थना करती हैं; युवा कन्याएँ समर्पित पति के लिए प्रार्थना करती हैं।
🏰
जयपुर और उदयपुर
भव्य शोभायात्राएँ गौरी को पुराने नगरों से होते हुए जल के किनारे तक ले जाती हैं।
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