कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पर्वत का सम्मान
गोवर्धन पूजा उस दिन का स्मरण कराती है जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सात दिनों तक धारण किया, ताकि व्रज के लोगों और गौओं को इंद्र द्वारा भेजी गई मूसलधार वर्षा से आश्रय मिल सके। इस घटना ने इंद्र का अहंकार दूर किया और गोवर्धन पर्वत, गौओं तथा प्रकृति की पूजा को व्रज की भक्ति के केंद्र में स्थापित किया।
इस दिन गौ पूजा (गौओं की पूजा) की जाती है, तथा घरों और मंदिरों में गोबर, अन्न या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर उसकी पूजा की जाती है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, यानी दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है।
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