Chaitra Purnima: the birth of Sri Hanuman, son of Vayu
हनुमान जयंती श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान के जन्म का उत्सव है। उत्तर भारत और देश के अधिकांश भागों में यह चैत्र की पूर्णिमा को मनाई जाती है।
हनुमान का जन्म शाप के कारण पृथ्वी पर रह रही दिव्य अप्सरा अंजना और वानरराज केसरी से हुआ। पवनदेव वायु के आशीर्वाद से वे पवनपुत्र और मारुति कहलाते हैं, और भगवान शिव के अंश के रूप में पूजित हैं।
बचपन में उन्होंने उगते सूर्य को पका हुआ फल समझकर उसे पकड़ने के लिए आकाश में छलाँग लगाई। इंद्र का वज्र उनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा, जिससे उनका नाम हनुमान पड़ा। जब वायु दुःख से पीछे हट गए, तब देवताओं ने बालक को पुनः स्वस्थ किया और उसे बल, बुद्धि और हर हानि से रक्षा का वर दिया। इन्हीं शक्तियों से वे सीता की खोज में समुद्र पार करके लंका पहुँचे।
मंदिर भोर से पहले खुल जाते हैं, क्योंकि परंपरा के अनुसार हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था। भक्त सिंदूर और तेल अर्पित करते हैं, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उपवास रखते हैं और प्रसाद बाँटते हैं।
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