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ॐ

हनुमान जयंती 2187

चैत्र पूर्णिमा: वायुपुत्र श्री हनुमान का जन्म

📍 बेंगलुरु, भारत
हनुमान जयंती · 2187
📍 बेंगलुरु, भारत
अप्रैल 22, 2187
चैत्र पूर्णिमा: वायुपुत्र श्री हनुमान का जन्म
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:04:22 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:32:26 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
अप्रैल 21
06:04:54 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अप्रैल 22
06:04:22 पूर्वाह्न
🐒 पूर्णिमा शुरू
अप्रैल 22
07:47:33 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अप्रैल 22
06:32:26 अपराह्न
🐒 पूर्णिमा समाप्त
अप्रैल 23
05:23:36 पूर्वाह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अप्रैल 23
06:03:52 पूर्वाह्न
परिचय

हनुमान जयंती

हनुमान जयंती श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान के जन्म का उत्सव है। उत्तर भारत और देश के अधिकांश भागों में यह चैत्र की पूर्णिमा को मनाई जाती है।

हनुमान का जन्म शाप के कारण पृथ्वी पर रह रही दिव्य अप्सरा अंजना और वानरराज केसरी से हुआ। पवनदेव वायु के आशीर्वाद से वे पवनपुत्र और मारुति कहलाते हैं, और भगवान शिव के अंश के रूप में पूजित हैं।

बचपन में उन्होंने उगते सूर्य को पका हुआ फल समझकर उसे पकड़ने के लिए आकाश में छलाँग लगाई। इंद्र का वज्र उनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा, जिससे उनका नाम हनुमान पड़ा। जब वायु दुःख से पीछे हट गए, तब देवताओं ने बालक को पुनः स्वस्थ किया और उसे बल, बुद्धि और हर हानि से रक्षा का वर दिया। इन्हीं शक्तियों से वे सीता की खोज में समुद्र पार करके लंका पहुँचे।

मंदिर भोर से पहले खुल जाते हैं, क्योंकि परंपरा के अनुसार हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था। भक्त सिंदूर और तेल अर्पित करते हैं, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उपवास रखते हैं और प्रसाद बाँटते हैं।

परंपरा और विधि
🌕
चैत्र पूर्णिमा
चैत्र की पूर्णिमा, जो पूरे उत्तर भारत में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
🙏
राम भक्ति
हनुमान निःस्वार्थ सेवा और भक्ति के आदर्श हैं।
📿
चालीसा और सुंदरकांड
घरों और मंदिरों में दिन भर इनका पाठ होता है।
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