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ॐ

इंदिरा एकादशी 2034

भाद्रपद कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत

📍 बेंगलुरु, भारत
इंदिरा एकादशी · 2034
📍 बेंगलुरु, भारत
अक्तूबर 8, 2034
भाद्रपद कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:10:17 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:04:23 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 7
06:10:13 पूर्वाह्न
🌙 एकादशी प्रारंभ
अक्तूबर 7
08:59:10 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 8
06:10:17 पूर्वाह्न
🌙 एकादशी समाप्त
अक्तूबर 8
08:52:28 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 8
06:04:23 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 9
06:10:22 पूर्वाह्न
परिचय

इंदिरा एकादशी

श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को माहिष्मती के राजा इंद्रसेन की कथा सुनाई, जो विष्णु के धर्मपरायण भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद यम लोक से एक संदेश लेकर उनकी सभा में पधारे।

नारद ने बताया कि उन्होंने वहाँ इंद्रसेन के दिवंगत पिता को देखा है, जो एक बार एकादशी व्रत भंग करने के कारण कष्ट पा रहे हैं। पिता ने अपने पुत्र से कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और उसका पुण्य उनकी मुक्ति के लिए अर्पित करने को कहा है।

नारद ने राजा को विधि बताई: दशमी को संयम, एकादशी को उपवास और विष्णु पूजा के साथ पितरों के लिए श्राद्ध, ब्राह्मणों को दान, और रात्रि जागरण। इंद्रसेन ने परिवार सहित यह सब किया। आकाश से पुष्पवर्षा हुई, और उनके पिता गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णु धाम को गए। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण यह एकादशी विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए रखी जाती है।

परंपरा और विधि
🕯️
पितरों के लिए
पितृ पक्ष में रखी जाती है, और इसका पुण्य दिवंगत पूर्वजों की मुक्ति के लिए अर्पित किया जाता है।
🎶
नारद का संदेश
देवर्षि ने यम लोक से राजा इंद्रसेन को समाचार दिया।
🦅
पिता की मुक्ति
इंद्रसेन के पिता गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णु धाम को गए।
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