Bhadrapada Krishna Ekadashi: the fast dedicated to Lord Vishnu
श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को माहिष्मती के राजा इंद्रसेन की कथा सुनाई, जो विष्णु के धर्मपरायण भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद यम लोक से एक संदेश लेकर उनकी सभा में पधारे।
नारद ने बताया कि उन्होंने वहाँ इंद्रसेन के दिवंगत पिता को देखा है, जो एक बार एकादशी व्रत भंग करने के कारण कष्ट पा रहे हैं। पिता ने अपने पुत्र से कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और उसका पुण्य उनकी मुक्ति के लिए अर्पित करने को कहा है।
नारद ने राजा को विधि बताई: दशमी को संयम, एकादशी को उपवास और विष्णु पूजा के साथ पितरों के लिए श्राद्ध, ब्राह्मणों को दान, और रात्रि जागरण। इंद्रसेन ने परिवार सहित यह सब किया। आकाश से पुष्पवर्षा हुई, और उनके पिता गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णु धाम को गए। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण यह एकादशी विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए रखी जाती है।
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