इंदिरा एकादशी 2202
भाद्रपद कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत
इंदिरा एकादशी
श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को माहिष्मती के राजा इंद्रसेन की कथा सुनाई, जो विष्णु के धर्मपरायण भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद यम लोक से एक संदेश लेकर उनकी सभा में पधारे।
नारद ने बताया कि उन्होंने वहाँ इंद्रसेन के दिवंगत पिता को देखा है, जो एक बार एकादशी व्रत भंग करने के कारण कष्ट पा रहे हैं। पिता ने अपने पुत्र से कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और उसका पुण्य उनकी मुक्ति के लिए अर्पित करने को कहा है।
नारद ने राजा को विधि बताई: दशमी को संयम, एकादशी को उपवास और विष्णु पूजा के साथ पितरों के लिए श्राद्ध, ब्राह्मणों को दान, और रात्रि जागरण। इंद्रसेन ने परिवार सहित यह सब किया। आकाश से पुष्पवर्षा हुई, और उनके पिता गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णु धाम को गए। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण यह एकादशी विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए रखी जाती है।
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