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ॐ

ज्येष्ठा लक्ष्मी व्रत 2055

Aavahan, Puja and Visarjan of Jyeshtha Lakshmi (Jyestha Gowri), for your city

📍 Bangalore, India
ज्येष्ठा लक्ष्मी व्रत · 2055
📍 Bangalore, India
सोमवार, अगस्त 30, 2055
Aavahan, Puja and Visarjan of Jyeshtha Lakshmi (Jyestha Gowri), for your city
Jyeshtha Lakshmi Vratam Dates · Bangalore
🌸
आवाहन (अनुराधा नक्षत्र)
रविवार, अगस्त 29, 2055
🙏
पूजा (ज्येष्ठा नक्षत्र)
सोमवार, अगस्त 30, 2055
🌊
विसर्जन (मूल नक्षत्र)
मंगलवार, अगस्त 31, 2055
परिचय

ज्येष्ठा लक्ष्मी व्रत

ज्येष्ठा लक्ष्मी व्रत (ज्येष्ठा गौरी पूजा) भाद्रपद शुक्ल पक्ष में, गणेश चतुर्थी के निकट मनाया जाने वाला तीन दिनों का व्रत है: अनुराधा नक्षत्र में आवाहन, ज्येष्ठा नक्षत्र में पूजा, और मूल नक्षत्र में विसर्जन। ज्येष्ठा नक्षत्र और भाद्रपद शुक्ल अष्टमी की निकटता ही इस पूरे क्रम का आधार है। पूजा के दिन का निर्णय इन दोनोंमें से जो प्रबल हो उसपर निर्भर करता है, और आवाहन-विसर्जनके दिन पूजाके निश्चित दिनका ही अनुसरण करते हैं।

इस व्रतका मूल एक पौराणिक कथामें है: असुरोंसे पीड़ित स्त्रियोंने श्री महालक्ष्मी गौरीकी शरण ली। उन्होंने भाद्रपद शुक्ल अष्टमीके दिन असुरोंका संहार करके अपने पतियोंका और समस्त प्राणियोंका कल्याण किया: यही स्मृति व्रतकी मुख्य प्रार्थना, अखंड सौभाग्य और समृद्धिकी कामना, में आज भी जीवित है। (स्रोत: Sanatan Sanstha, Tirth.com)

आवाहन एवं जप मंत्र

एह्येहि त्वं महाभागे सुरासुरनमस्कृते ।
ज्येष्ठे त्वं सर्वदेवानां मत्समीपगता भव ॥

ehyehi tvaṃ mahābhāge surāsuranamaskṛte, jyeṣṭhe tvaṃ sarvadevānāṃ matsamīpagatā bhava: देवीको समीप बुलानेका आवाहन मंत्र।

ॐ पार्वत्यै नमः । ॐ गौर्यै नमः ॥

(स्रोत: panditjipune.com, Sanatan.org)

परंपरा और विधि
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आवाहन: अनुराधा नक्षत्र
अनुराधा नक्षत्रके दिन देवीका आवाहन घरमें किया जाता है।
🙏
पूजा: ज्येष्ठा नक्षत्र
भाद्रपद शुक्ल अष्टमीके निकट, ज्येष्ठा नक्षत्रके दिन मुख्य पूजा होती है।
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विसर्जन: मूल नक्षत्र
मूल नक्षत्रके दिन विसर्जन एवं विदाई की जाती है।
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