कामदा एकादशी 2032
चैत्र शुक्ल एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत (वासुदेव)
कामदा एकादशी
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वह कथा सुनाई जो कभी महर्षि वसिष्ठ ने राजा दिलीप को सुनाई थी। नागराज पुंडरीक के दरबार में गंधर्व गायक ललित और उनकी पतिव्रता पत्नी ललिता रहते थे।
एक दिन राजा के सामने गाते समय ललित का मन अपनी पत्नी की ओर चला गया और उनका गान लड़खड़ा गया। क्रोधित राजा ने उन्हें भयंकर नरभक्षी राक्षस बनने का शाप दे दिया। दुःखी ललिता अपने पति के पीछे पीछे वनों में भटकती हुई एक ऋषि के आश्रम पहुँचीं, जिन्होंने उन्हें चैत्र शुक्ल की कामदा एकादशी का व्रत करने को कहा।
ललिता ने भक्तिपूर्वक उपवास किया, विष्णु की पूजा की, और द्वादशी को व्रत का पुण्य अपने पति को अर्पित कर दिया। उसी क्षण शाप दूर हो गया और ललित ने अपना तेजस्वी गंधर्व रूप फिर से पा लिया। दोनों साथ साथ स्वर्ग लौट गए। कामदा का अर्थ है कामनाएँ पूर्ण करने वाली: कहा जाता है कि यह व्रत धर्मसम्मत इच्छाएँ पूरी करता है और गंभीर पापों को भी दूर करता है।
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