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ॐ

क्षीराब्धि द्वादशी 2090

कार्तिक शुक्ल द्वादशी: उसिरी की टहनी के साथ तुलसी और दामोदर

📍 बेंगलुरु, भारत
क्षीराब्धि द्वादशी · 2090
📍 बेंगलुरु, भारत
शुक्रवार, नवम्बर 3, 2090
कार्तिक शुक्ल द्वादशी: उसिरी की टहनी के साथ तुलसी और दामोदर
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:15:02 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
05:51:31 अपराह्न
परिचय

क्षीराब्धि द्वादशी

क्षीराब्धि द्वादशी (క్షీరాబ్ధి ద్వాదశి) कार्तिक शुक्ल द्वादशी है, उत्थान एकादशी के अगले दिन। क्षीर सागर (क्षीराब्धि) पर चार मास की योगनिद्रा से जागकर भगवान विष्णु लक्ष्मी के साथ तुलसी के वृंदावन में आते हैं। इसे चिलुकु द्वादशी भी कहते हैं, जो क्षीर सागर के मंथन की याद दिलाता है।

संध्या को स्त्रियाँ तुलसी कोट को कोलम और दीपों से सजाती हैं, तुलसी के पौधे के पास भगवान दामोदर के रूप में उसिरी (आँवले) की एक डाल रखती हैं, और तुलसी दामोदर कल्याणम् करती हैं। आँगन के चारों ओर दीपों की पंक्तियाँ जलाई जाती हैं, और क्षीराब्धि द्वादशी व्रत की कथा पढ़ी जाती है।

परंपरा और विधि
🌿
तुलसी कल्याणम्
तुलसी कोट पर तुलसी का विवाह भगवान दामोदर से होता है।
🍏
उसिरी की डाल
तुलसी के पौधे के पास रखी आँवले की डाल भगवान का प्रतीक है।
🪔
दीप
संध्या को आँगन के चारों ओर दीपों की पंक्तियाँ जलाई जाती हैं।
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