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ॐ

मार्गळि 1956

The sacred month: Tiruppavai at dawn, kolam and bhajans

📍 Bangalore, India
‹ 1956 ›
मार्गळि · 1956
📍 Bangalore, India
शनिवार, दिसम्बर 15, 1956
The sacred month: Tiruppavai at dawn, kolam and bhajans
मार्गळि: दिन प्रतिदिन · Bangalore
मार्गळितारीखपाशुरम्सूर्योदयत्योहार
1Sat, दिसम्बर 15, 1956106:34:54 AM
2Sun, दिसम्बर 16, 1956206:35:26 AM
3Mon, दिसम्बर 17, 1956306:35:58 AM
4Tue, दिसम्बर 18, 1956406:36:30 AM
5Wed, दिसम्बर 19, 1956506:37:01 AM
6Thu, दिसम्बर 20, 1956606:37:32 AM
7Fri, दिसम्बर 21, 1956706:38:02 AM
8Sat, दिसम्बर 22, 1956806:38:32 AM
9Sun, दिसम्बर 23, 1956906:39:01 AM
10Mon, दिसम्बर 24, 19561006:39:30 AM
11Tue, दिसम्बर 25, 19561106:39:59 AM
12Wed, दिसम्बर 26, 19561206:40:27 AM
13Thu, दिसम्बर 27, 19561306:40:54 AM
14Fri, दिसम्बर 28, 19561406:41:20 AM
15Sat, दिसम्बर 29, 19561506:41:46 AM
16Sun, दिसम्बर 30, 19561606:42:11 AM
17Mon, दिसम्बर 31, 19561706:42:35 AMतमिल हनुमान जयंती
18Tue, जनवरी 1, 19571806:42:59 AM
19Wed, जनवरी 2, 19571906:43:22 AM
20Thu, जनवरी 3, 19572006:43:44 AM
21Fri, जनवरी 4, 19572106:44:05 AM
22Sat, जनवरी 5, 19572206:44:25 AM
23Sun, जनवरी 6, 19572306:44:44 AM
24Mon, जनवरी 7, 19572406:45:03 AM
25Tue, जनवरी 8, 19572506:45:20 AM
26Wed, जनवरी 9, 19572606:45:37 AM
27Thu, जनवरी 10, 19572706:45:52 AM
28Fri, जनवरी 11, 19572806:46:07 AM
29Sat, जनवरी 12, 19572906:46:20 AM
परिचय

मार्गळि

मार्गळि (மார்கழி) वह तमिल मास है जब सूर्य धनु राशि में होते हैं, अर्थात धनुर्मास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं “मासों में मैं मार्गशीर्ष हूँ”, और पूरा मास भोर से पहले की उपासना को समर्पित रहता है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्त्रियाँ द्वार पर बड़े बड़े कोलम् बनाती हैं, भजन मंडलियाँ गाते हुए गलियों में घूमती हैं, और मंदिर भोर की विशेष पूजा के लिए जल्दी खुलते हैं। प्रतिदिन आण्डाल के तिरुप्पावै का एक पद गाया जाता है, तीस दिनों के लिए तीस पद, और साथ ही तिरुप्पळ्ळियेऴुच्चि सहित माणिक्कवासगर के तिरुवेम्पावै का भी।

इसी मास में वैकुंठ एकादशी आती है, जब श्रीरंगम में स्वर्ग का द्वार खुलता है, चिदंबरम में भगवान नटराज का आरुद्रा दर्शनम् होता है, और हनुमान जयंती भी। चेन्नई का संगीत और नृत्य का मौसम पूरे मास छाया रहता है, और मार्गळि थाई पोंगल की पूर्व संध्या, भोगी, के साथ समाप्त होता है।

परंपरा और विधि
🌸
भोर में कोलम्
प्रातःकाल हर द्वार पर बड़े बड़े कोलम् बनाए जाते हैं।
📖
तिरुप्पावै
प्रतिदिन आण्डाल के तिरुप्पावै का एक पाशुरम् और तिरुवेम्पावै का एक पद।
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संगीत का मौसम
चेन्नई के संगीत समारोह और नृत्य पूरे मास छाए रहते हैं।
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