The sacred month: Tiruppavai at dawn, kolam and bhajans
| Margazhi | Date | Pasuram | Sunrise | Festivals |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Wed, Dec 17, 2087 | 1 | 06:35:47 AM | |
| 2 | Thu, Dec 18, 2087 | 2 | 06:36:18 AM | |
| 3 | Fri, Dec 19, 2087 | 3 | 06:36:49 AM | |
| 4 | Sat, Dec 20, 2087 | 4 | 06:37:20 AM | |
| 5 | Sun, Dec 21, 2087 | 5 | 06:37:50 AM | |
| 6 | Mon, Dec 22, 2087 | 6 | 06:38:20 AM | |
| 7 | Tue, Dec 23, 2087 | 7 | 06:38:49 AM | |
| 8 | Wed, Dec 24, 2087 | 8 | 06:39:18 AM | |
| 9 | Thu, Dec 25, 2087 | 9 | 06:39:46 AM | Tamil Hanuman Jayanti |
| 10 | Fri, Dec 26, 2087 | 10 | 06:40:13 AM | |
| 11 | Sat, Dec 27, 2087 | 11 | 06:40:40 AM | |
| 12 | Sun, Dec 28, 2087 | 12 | 06:41:07 AM | |
| 13 | Mon, Dec 29, 2087 | 13 | 06:41:32 AM | |
| 14 | Tue, Dec 30, 2087 | 14 | 06:41:57 AM | |
| 15 | Wed, Dec 31, 2087 | 15 | 06:42:21 AM | |
| 16 | Thu, Jan 1, 2088 | 16 | 06:42:44 AM | |
| 17 | Fri, Jan 2, 2088 | 17 | 06:43:07 AM | |
| 18 | Sat, Jan 3, 2088 | 18 | 06:43:29 AM | |
| 19 | Sun, Jan 4, 2088 | 19 | 06:43:50 AM | |
| 20 | Mon, Jan 5, 2088 | 20 | 06:44:10 AM | |
| 21 | Tue, Jan 6, 2088 | 21 | 06:44:29 AM | |
| 22 | Wed, Jan 7, 2088 | 22 | 06:44:47 AM | |
| 23 | Thu, Jan 8, 2088 | 23 | 06:45:04 AM | Aarudra Darshanam |
| 24 | Fri, Jan 9, 2088 | 24 | 06:45:20 AM | |
| 25 | Sat, Jan 10, 2088 | 25 | 06:45:36 AM | |
| 26 | Sun, Jan 11, 2088 | 26 | 06:45:50 AM | |
| 27 | Mon, Jan 12, 2088 | 27 | 06:46:03 AM | |
| 28 | Tue, Jan 13, 2088 | 28 | 06:46:16 AM | |
| 29 | Wed, Jan 14, 2088 | 29 | 06:46:27 AM | Bhogi, Lohri |
मार्गळि (மார்கழி) वह तमिल मास है जब सूर्य धनु राशि में होते हैं, अर्थात धनुर्मास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं “मासों में मैं मार्गशीर्ष हूँ”, और पूरा मास भोर से पहले की उपासना को समर्पित रहता है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्त्रियाँ द्वार पर बड़े बड़े कोलम् बनाती हैं, भजन मंडलियाँ गाते हुए गलियों में घूमती हैं, और मंदिर भोर की विशेष पूजा के लिए जल्दी खुलते हैं। प्रतिदिन आण्डाल के तिरुप्पावै का एक पद गाया जाता है, तीस दिनों के लिए तीस पद, और साथ ही तिरुप्पळ्ळियेऴुच्चि सहित माणिक्कवासगर के तिरुवेम्पावै का भी।
इसी मास में वैकुंठ एकादशी आती है, जब श्रीरंगम में स्वर्ग का द्वार खुलता है, चिदंबरम में भगवान नटराज का आरुद्रा दर्शनम् होता है, और हनुमान जयंती भी। चेन्नई का संगीत और नृत्य का मौसम पूरे मास छाया रहता है, और मार्गळि थाई पोंगल की पूर्व संध्या, भोगी, के साथ समाप्त होता है।
आज का पंचांग, त्योहार, मुहूर्त और बहुत कुछ देखें
🕉 पंचांग चैट खोलें