मोक्षदा एकादशी
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को चंपक नगर के राजा वैखानस की कथा सुनाई, जो अपनी प्रजा का पालन पिता की तरह करते थे। एक रात उन्होंने स्वप्न देखा कि उनके दिवंगत पिता एक नरक लोक में कष्ट भोग रहे हैं और उद्धार की याचना कर रहे हैं।
व्याकुल होकर राजा ने अपने ब्राह्मणों से सहायता माँगी, और उन्होंने उन्हें महर्षि पर्वत के पास भेजा, जो भूत, वर्तमान और भविष्य देख सकते थे। पर्वत ने बताया कि पिछले जन्म में पिता ने अपनी पत्नी के साथ अन्याय किया था, और उसी पाप ने उन्हें बाँध रखा था। उपाय यह था कि मार्गशीर्ष शुक्ल की मोक्षदा एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य पिता को दिया जाए।
वैखानस ने पूरे परिवार के साथ उपवास रखा और पुण्य अर्पित किया। आकाश से पुष्प बरसे, और मुक्त हुए पिता ने स्वर्ग से उन्हें आशीर्वाद दिया। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। यह दिन गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, वह दिन जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।
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