ॐ
নাগুলা চতুর্থী 2026
কার্তিক শুক্ল চতুর্থী: নাগ দেবতাদের পূজা
📍
বেঙ্গালুরু, ভারত
নাগুলা চতুর্থী · 2026
📍 বেঙ্গালুরু, ভারত
নভেম্বর 13, 2026
কার্তিক শুক্ল চতুর্থী: নাগ দেবতাদের পূজা
সময় · বেঙ্গালুরু
সূর্যোদয়
06:18:29 পূর্বাহ্ণ
সূর্যাস্ত
05:49:32 অপরাহ্ণ
চন্দ্রোদয়
09:34:39 পূর্বাহ্ণ
চন্দ্রাস্ত
09:04:00 অপরাহ্ণ
🌅 পূর্ববর্তী সূর্যোদয়
নভেম্বর 12
06:18:05 পূর্বাহ্ণ
🌘 তিথি শুরু
নভেম্বর 12
06:09:30 অপরাহ্ণ
🌅 সূর্যোদয়
নভেম্বর 13
06:18:29 পূর্বাহ্ণ
🌇 সূর্যাস্ত
নভেম্বর 13
05:49:32 অপরাহ্ণ
🌒 তিথি শেষ
নভেম্বর 13
08:42:43 অপরাহ্ণ
🌅 পরবর্তী সূর্যোদয়
নভেম্বর 14
06:18:54 পূর্বাহ্ণ
পরিচিতি
নাগুলা চতুর্থী
নাগুলা চতুর্থী কার্তিক শুক্ল চতুর্থীতে পালিত একটি নাগ (সর্প) পূজার উৎসব, যা প্রধানত অন্ধ্র প্রদেশ ও তেলেঙ্গানায় শ্রাবণের নাগ পঞ্চমীর কার্তিক-মাসের সমতুল্য হিসেবে পালিত হয়। ভক্তরা সূর্যোদয়ের আগে উঠে উইঢিবি (যা নাগের বাসস্থান বলে বিশ্বাস করা হয়) বা সাপের মূর্তি দর্শন করেন, দুধ, হলুদ, সিঁদুর ও ফুল নিবেদন করেন, এবং পরিবারের সুরক্ষা ও কল্যাণের জন্য প্রার্থনা করেন।
হিন্দু পঞ্জিকায় কার্তিক মাসকে সবচেয়ে পবিত্র মাসগুলির একটি বলে গণ্য করা হয়, এবং এই সময়ে পালিত নাগ পূজা পরিবারের বংশধারাকে সাপ-সম্পর্কিত অনিষ্ট থেকে সুরক্ষা, সন্তান-সমৃদ্ধি এবং সাধারণ কল্যাণ প্রদানকারী বলে বিবেচিত হয়।
सर्प स्तोत्रम्
ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥
विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥
रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥
खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥
सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥
मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥
धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥
समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥
ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥
पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥
रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥
विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥
रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥
खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥
सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥
मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥
धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥
समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥
ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥
पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥
रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
সর্প স্তোত্রম্
ঐতিহ্য ও আচার
নাগ পূজা
ভক্তরা সূর্যোদয়ের আগে উইঢিবি বা সাপের মূর্তিতে দুধ, হলুদ ও ফুল নিবেদন করেন, সাপ-সম্পর্কিত অনিষ্ট থেকে সুরক্ষা এবং পরিবারের কল্যাণের জন্য প্রার্থনা করেন।
কার্তিক শুক্ল চতুর্থী
কার্তিক মাসের শুক্ল পক্ষের চতুর্থ দিনে (চতুর্থী) পালিত হয়, যা হিন্দু পঞ্জিকার সবচেয়ে পবিত্র মাসগুলির একটি।
শুভ সময়
চৌঘড়িয়া মুহূর্ত
| চৌঘড়িয়া | থেকে | পর্যন্ত |
|---|---|---|
| চল | নভেম্বর/13/2026 06:18:29 AM | নভেম্বর/13/2026 07:44:52 AM |
| অমৃত | নভেম্বর/13/2026 09:22:46 AM | নভেম্বর/13/2026 10:37:38 AM |
| শুভ | নভেম্বর/13/2026 12:04:01 PM | নভেম্বর/13/2026 12:27:03 PM |
| শুভ | নভেম্বর/13/2026 01:13:07 PM | নভেম্বর/13/2026 01:30:23 PM |
| চল | নভেম্বর/13/2026 04:23:09 PM | নভেম্বর/13/2026 05:49:32 PM |
| লাভ | নভেম্বর/13/2026 08:56:52 PM | নভেম্বর/13/2026 10:30:33 PM |
| শুভ | নভেম্বর/14/2026 12:04:13 AM | নভেম্বর/14/2026 01:37:53 AM |
| অমৃত | নভেম্বর/14/2026 01:37:53 AM | নভেম্বর/14/2026 03:11:34 AM |
| চল | নভেম্বর/14/2026 03:11:34 AM | নভেম্বর/14/2026 04:45:14 AM |
গৌরী পঞ্চাং
দিন
| সুগম | নভেম্বর/13/2026 06:18:29 AM – নভেম্বর/13/2026 07:44:52 AM | |
| উত্তি | নভেম্বর/13/2026 09:22:46 AM – নভেম্বর/13/2026 10:37:38 AM | |
| অমৃতা | নভেম্বর/13/2026 12:04:01 PM – নভেম্বর/13/2026 12:27:03 PM | |
| অমৃতা | নভেম্বর/13/2026 01:13:07 PM – নভেম্বর/13/2026 01:30:23 PM | |
| ধনম | নভেম্বর/13/2026 04:23:09 PM – নভেম্বর/13/2026 05:49:32 PM |
রাত
| লাভম | নভেম্বর/13/2026 07:23:12 PM – নভেম্বর/13/2026 08:56:52 PM | |
| ধনম | নভেম্বর/13/2026 08:56:52 PM – নভেম্বর/13/2026 10:30:33 PM | |
| সুগম | নভেম্বর/13/2026 10:30:33 PM – নভেম্বর/14/2026 12:04:13 AM | |
| উত্তি | নভেম্বর/14/2026 01:37:53 AM – নভেম্বর/14/2026 03:11:34 AM | |
| অমৃতা | নভেম্বর/14/2026 04:45:14 AM – নভেম্বর/14/2026 06:18:54 AM |
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