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ॐ

नागुला चविति 2006

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा

📍 बेंगलुरु, भारत
नागुला चविति · 2006
📍 बेंगलुरु, भारत
अक्तूबर 26, 2006
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:12:49 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
05:54:44 अपराह्न
चंद्रोदय
09:32:50 पूर्वाह्न
चंद्रास्त
09:01:37 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 25
06:12:36 पूर्वाह्न
🌘 तिथि शुरू
अक्तूबर 25
03:29:22 अपराह्न
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 26
06:12:49 पूर्वाह्न
🌒 तिथि समाप्त
अक्तूबर 26
04:13:24 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 26
05:54:44 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 27
06:13:02 पूर्वाह्न
परिचय

नागुला चविति

नागुला चविति कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को पड़ने वाला एक नाग (सर्प) पूजा पर्व है, जो मुख्यतः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में श्रावण की नाग पंचमी के कार्तिक-मास समकक्ष के रूप में मनाया जाता है। भक्त सूर्योदय से पहले उठकर बाँबी (जिसे नाग का निवास माना जाता है) या सर्प प्रतिमा के दर्शन करते हैं, दूध, हल्दी, सिंदूर और फूल अर्पित करते हैं, तथा परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, और इस दौरान की गई नाग पूजा परिवार की वंश-परंपरा को सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा, संतान-समृद्धि और सामान्य कल्याण प्रदान करने वाली मानी जाती है।

सर्प स्तोत्रम्

ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥

विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥

रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥

खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥

सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥

मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥

धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥

समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥

ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥

ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥

पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥

रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
सर्प स्तोत्रम्
परंपरा और विधि
🐍
नाग पूजा
भक्त सूर्योदय से पहले बाँबी या सर्प प्रतिमा पर दूध, हल्दी और फूल अर्पित करते हैं, सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
📅
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में से एक है।
शुभ समय

चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़ियासेतक
चल अक्तूबर/26/2006 10:53:35 AM अक्तूबर/26/2006 12:03:46 PM
लाभ अक्तूबर/26/2006 12:03:46 PM अक्तूबर/26/2006 01:31:31 PM
शुभ अक्तूबर/26/2006 04:27:00 PM अक्तूबर/26/2006 05:54:44 PM
अमृत अक्तूबर/26/2006 05:54:44 PM अक्तूबर/26/2006 07:27:02 PM
चल अक्तूबर/26/2006 07:27:02 PM अक्तूबर/26/2006 08:59:19 PM
लाभ अक्तूबर/27/2006 12:03:53 AM अक्तूबर/27/2006 01:36:10 AM
शुभ अक्तूबर/27/2006 03:08:28 AM अक्तूबर/27/2006 04:40:45 AM
अमृत अक्तूबर/27/2006 04:40:45 AM अक्तूबर/27/2006 06:13:02 AM
गौरी पंचांग
दिन
सुगम अक्तूबर/26/2006 07:40:33 AM – अक्तूबर/26/2006 09:08:18 AM
उत्ती अक्तूबर/26/2006 10:53:35 AM – अक्तूबर/26/2006 12:03:46 PM
अमृता अक्तूबर/26/2006 12:03:46 PM – अक्तूबर/26/2006 01:31:31 PM
लाभम अक्तूबर/26/2006 04:27:00 PM – अक्तूबर/26/2006 05:54:44 PM
रात
अमृता अक्तूबर/26/2006 05:54:44 PM – अक्तूबर/26/2006 07:27:02 PM
लाभम अक्तूबर/26/2006 10:31:36 PM – अक्तूबर/27/2006 12:03:53 AM
धनम अक्तूबर/27/2006 12:03:53 AM – अक्तूबर/27/2006 01:36:10 AM
सुगम अक्तूबर/27/2006 01:36:10 AM – अक्तूबर/27/2006 03:08:28 AM
उत्ती अक्तूबर/27/2006 04:40:45 AM – अक्तूबर/27/2006 06:13:02 AM
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