ॐ
नागुल पंचमी 1934
श्रावण शुक्ल पंचमी: नाग देवताओं के लिए बांबी पर दूध
📍
बेंगलुरु, भारत
नागुल पंचमी · 1934
📍 बेंगलुरु, भारत
बुधवार, अगस्त 15, 1934
श्रावण शुक्ल पंचमी: नाग देवताओं के लिए बांबी पर दूध
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:08:16 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:40:19 अपराह्न
परिचय
नागुल पंचमी
नागुल पंचमी (నాగుల పంచమి) श्रावण शुक्ल पंचमी है, नाग पंचमी का तेलुगु नाम, नाग देवताओं का दिन।
परिवार सुबह जल्दी उस पुट्टा (बाँबी) पर जाते हैं जहाँ नागों का वास माना जाता है, उसे हल्दी और कुमकुम से सजाते हैं, और उसमें दूध डालते हैं। चलिमिडि (गुड़ के साथ चावल का आटा), चिम्मिलि और अंकुरित दालें अर्पित की जाती हैं, और बाँबी पर सूती धागे रखे जाते हैं। अनेक लोग पूजा पूरी होने तक उपवास रखते हैं और परिवार की रक्षा तथा बच्चों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
तेलुगु प्रदेशों में नागों की पूजा कार्तिक में नागुला चविति पर भी होती है, जो आंध्र में दोनों दिनों में बड़ा पर्व है।
परंपरा और विधि
पुट्टा पूजा
बाँबी में दूध डाला जाता है और उसे हल्दी और कुमकुम से सजाया जाता है।
चलिमिडि
गुड़ के साथ चावल का आटा और अंकुरित दालें नाग देवताओं को अर्पित की जाती हैं।
रक्षा
परिवार रक्षा और बच्चों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
शास्त्री जी से पूछें
उसी दिन
नाग पंचमी
कार्तिक
नागुला चविति
श्रवण
वरलक्ष्मी व्रत
पंचांग खोलें
दैनिक पंचांग
पंचांग खोलें
बेंगलुरु का दैनिक पंचांग
अन्वेषण करें
सभी लेख
आज का पंचांग, त्योहार, मुहूर्त और बहुत कुछ देखें
🕉 पंचांग चैट खोलें