Agastya (the star Canopus, second brightest in the night sky, but invisible from much of the northern hemisphere) is associated in Vedic tradition with the sage Agastya, credited with bringing Vedic culture to South India. Each year it disappears into the Sun's glare (Asta) and later reappears (Udaya, or Darshan), a marker long used to anchor parts of the ritual calendar, most notably the timing of Upakarma observances.
Dates for 2021 · Mumbai
Agastya Timeline
🌇
Agastya Asta
May 15, 2021 · 07:05:04 PM (sunset)
Passed
🌄
Agastya Udaya (Darshan)
August 9, 2021 · 06:19:06 AM (sunrise)
Passed
Significance
What the Tradition Says
Upakarma Timing
Agastya's heliacal rising is one of the traditional markers used alongside Shravana Nakshatra and other criteria for placing Yajur/Rigveda Upakarma within its correct window.
Scientific Basis
These dates are computed from the real astronomical positions of Canopus and the Sun for each year, not a fixed calendar date.
Latitude Dependence
Canopus's visibility depends strongly on latitude, and it never rises at all north of roughly the mid-latitudes.
Ritual
अर्घ्य दान की विधि
🙏 अर्घ्य मुहूर्त
05:40:01 AM – 06:19:06 AM
August 9, 2021 · Mumbai
दिशा
दक्षिणाभिमुख होकर
यज्ञोपवीत
सव्य (बाएं कंधे पर)
पात्र
शंख या कमंडलु में शुद्ध जल, अक्षत, काश पुष्प, फल (नारंगी, केला, खजूर, नारियल), सुगंधित द्रव्य
संख्या
तीन बार अर्घ्य
अंत में
लोपामुद्रा को भी एक बार अर्घ्य
Legends
महर्षि अगस्त्य की तीन कथाएँ
विंध्य पर्वत को झुकाने की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय विंध्याचल पर्वत अपनी ऊँचाई पर इतना घमंड करने लगा कि उसने सूर्य के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे दक्षिण भारत में सूर्य का प्रकाश पहुंचना बंद हो गया। देवताओं और ऋषियों के अनुरोध पर, अगस्त्य मुनि ने विंध्य पर्वत से दक्षिण की ओर यात्रा करने के लिए अनुमति माँगी। सम्मान में, विंध्य पर्वत झुक गया। अगस्त्य मुनि ने उसे आदेश दिया कि जब तक वे लौट न आएं, तब तक वह इसी तरह झुका रहे। महर्षि अगस्त्य ने कभी वापसी नहीं की, और इसी कारण विंध्य पर्वत आज भी अपनी मर्यादित स्थिति में है।
समुद्र-पान का आख्यान
एक अन्य प्रसिद्ध कथा में, वृत्रासुर नामक असुर की सेना समुद्र में छिप गई थी, जिससे देवता परेशान थे। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता माँगी, जिन्होंने उन्हें अगस्त्य मुनि के पास भेजा। अपनी मंत्र शक्ति से, अगस्त्य मुनि ने पूरे समुद्र का जल एक ही चुल्लू में पी लिया, जिससे असुरों का संहार संभव हुआ। इस कथा का खगोलीय और प्रतीकात्मक अर्थ गहन है। प्राचीन मनीषियों के अनुसार, यह कथा अगस्त्य तारे के उदय के साथ होने वाले जल वाष्पीकरण की प्रक्रिया का एक रूपक है। जब यह तारा उदय होता है, तो वर्षा प्रायः समाप्त हो जाती है और समुद्र के जल का वाष्पीकरण तीव्र हो जाता है। इस प्रकार, अगस्त्य मुनि का समुद्र-पान वास्तव में एक प्राकृतिक घटना का दिव्य और आध्यात्मिक निरूपण है।
लोपामुद्रा से विवाह
महर्षि अगस्त्य ने विदर्भ देश की विद्वान और वेदज्ञ राजकुमारी लोपामुद्रा से विवाह किया। उनके इस विवाह को गृहस्थ और आध्यात्मिक जीवन के आदर्श संतुलन का प्रतीक माना जाता है। लोपामुद्रा ने भी अपने पति के ज्ञान और प्रेम में डूबकर ऋचाओं की रचना की। इन दोनों का चरित्र एक आदर्श दम्पत्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने वनवास के समय भगवान राम और सीता का मार्गदर्शन भी किया था।
Scripture
पुराणों और ज्योतिष ग्रंथों में अगस्त्य अर्घ्य मंत्र
"अगस्त्य खनन करने वाले, प्रजा, संतान और बल की इच्छा करने वाले हैं। वे दोनों वर्णों का पोषण करने वाले ऋषि हैं और देवों में सत्य आशीष प्राप्त करने वाले हैं।"
"आप काश पुष्प के समान चमकते हैं, अग्नि और वायु से उत्पन्न हुए हैं, मित्र-वरुण के पुत्र हैं, विंध्य की वृद्धि को रोकने वाले हैं, मेघों के विष को हरने वाले हैं। हे रत्नों के प्रिय, देवेश, लंका में निवास करने वाले, आपको नमन।"
लोपामुद्रा के लिए विसर्जन मंत्र
राजपुत्रि महाभागे ऋषिपत्नि वरानने॥
लोपामुद्रे नमस्तुभ्यमर्घ्य मे प्रतिगृह्यताम्।
"हे राजपुत्री, महाभागा, ऋषि की पत्नी, सुंदर मुख वाली लोपामुद्रा, मेरा अर्घ्य स्वीकार करें।"
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On Durva Ashtami, if Agastya's heliacal Udaya has already occurred by that date, Arghya is offered to Agastya before beginning the Durva puja to Ganesha.