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ॐ

धनतेरस 1964: Brisbane, Queensland

अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी -- पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी: धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा

📍 Brisbane, Queensland, Australia
‹ 1964 ›
धनतेरस · 1964
📍 Brisbane, Queensland, Australia
November 1, 1964
अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी -- पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी: धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा
Diwali Week, Day by Day · Brisbane
🏅
धनतेरस
🗓 November 1, 1964
🔔 यम दीप दान, 🔱 प्रदोष
🕉 प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ (वृषभ स्थिर लग्न): Nov/1 07:09:21 PM – Nov/1 08:15:43 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ: वृषभ स्थिर लग्न
Nov/1 07:09:21 PM
समाप्त Nov/1 08:15:43 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Oct 31
04:58:54
🌅 सूर्योदय
Nov 1
04:58:08
🌘 त्रयोदशी शुरू
Nov 1
15:35:43
🌇 सूर्यास्त
Nov 1
18:05:18
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 2
04:57:24
🌘 त्रयोदशी समाप्त
Nov 2
15:41:42
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌑
काली चौदस
🗓 November 2, 1964
🔔 मास शिवरात्रि
🕉 निशीथ काल (काली पूजा): Nov/2 11:09:39 PM – Nov/2 11:53:02 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
निशीथ काल (काली पूजा)
Nov/2 11:09:39 PM
समाप्त Nov/2 11:53:02 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 1
04:58:08
🌅 सूर्योदय
Nov 2
04:57:24
🌘 चतुर्दशी शुरू
Nov 2
15:41:42
🌇 सूर्यास्त
Nov 2
18:06:00
🕛 Midnight Muhurta
Nov 2
23:09:39 – 23:53:02
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 3
04:56:41
🌑 चतुर्दशी समाप्त
Nov 3
16:14:40
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🪔
नरक चतुर्दशी
🗓 November 3, 1964
🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 04:20:19 AM – 04:56:41 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय)
04:20:19 AM
समाप्त 04:56:41 AM
🌘 चतुर्दशी शुरू
Nov 2
15:41:42
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 3
04:56:41
🌑 चतुर्दशी समाप्त
Nov 3
16:14:40
🌙 चंद्रोदय
Nov 4
04:53:06
🌅 सूर्योदय
Nov 4
04:55:59
🌇 सूर्यास्त
Nov 4
18:07:25
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 5
04:55:18
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
✨
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
🗓 November 4, 1964
🕉 प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ (वृषभ स्थिर लग्न): Nov/4 06:57:33 PM – Nov/4 08:17:00 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ: वृषभ स्थिर लग्न
Nov/4 06:57:33 PM
समाप्त Nov/4 08:17:00 PM
निशीथ काल (मध्यरात्रि)
Nov/4 11:09:46 PM
समाप्त Nov/4 11:52:57 PM
चोपड़ा पूजन (नई बहीखाता)
Nov/4 06:57:33 PM
समाप्त Nov/4 08:17:00 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 3
04:56:41
🌑 अमावस्या शुरू
Nov 3
16:14:40
🌅 सूर्योदय
Nov 4
04:55:59
🌒 अमावस्या समाप्त
Nov 4
17:16:17
🌇 सूर्यास्त
Nov 4
18:07:25
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 5
04:55:18
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकNov/4 05:39:03 AMNov/4 07:34:35 AM
कुंभNov/4 12:08:02 PMNov/4 02:24:13 PM
वृषभNov/4 06:57:34 PMNov/4 09:15:44 PM
चौघड़ियासेतक
लाभNov/4 04:55:59 AMNov/4 06:34:54 AM
चलNov/4 02:49:34 PMNov/4 04:28:29 PM
लाभNov/4 04:28:29 PMNov/4 06:07:25 PM
शुभNov/4 07:28:24 PMNov/4 08:49:23 PM
अमृतNov/4 08:49:23 PMNov/4 10:10:22 PM
चलNov/4 10:10:22 PMNov/4 11:31:22 PM
लाभNov/5 02:13:20 AMNov/5 03:34:19 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
📒
गुजराती नववर्ष / बलि प्रतिपदा
🗓 November 5, 1964
🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
🕉 चल चौघड़िया (मिति मुहूर्त): Nov/5 10:12:26 AM – Nov/5 11:31:43 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकNov/5 05:35:08 AMNov/5 07:30:40 AM
कुंभNov/5 12:04:06 PMNov/5 02:20:17 PM
वृषभNov/5 06:53:38 PMNov/5 09:11:48 PM
चौघड़ियासेतक
चलNov/5 10:12:26 AMNov/5 11:31:43 AM
लाभNov/5 11:31:43 AMNov/5 01:10:49 PM
शुभNov/5 04:29:02 PMNov/5 06:08:09 PM
अमृतNov/5 06:08:09 PMNov/5 07:28:57 PM
चलNov/5 07:28:57 PMNov/5 08:49:46 PM
लाभNov/5 11:31:23 PMNov/6 00:52:12 AM
शुभNov/6 02:13:01 AMNov/6 03:33:50 AM
अमृतNov/6 03:33:50 AMNov/6 04:54:38 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
👫
यम द्वितीया / भैया दूज
🗓 November 6, 1964
🕉 अपराह्न काल: Nov/6 12:51:11 PM – Nov/6 03:30:01 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अपराह्न काल
Nov/6 12:51:11 PM
समाप्त Nov/6 03:30:01 PM
चौघड़ियासेतक
चलNov/6 04:54:38 AMNov/6 06:33:55 AM
अमृतNov/6 08:26:26 AMNov/6 09:52:28 AM
शुभNov/6 11:31:45 AMNov/6 11:58:14 AM
शुभNov/6 12:51:11 PMNov/6 01:11:02 PM
चलNov/6 04:29:35 PMNov/6 06:08:52 PM
लाभNov/6 08:50:09 PMNov/6 10:10:48 PM
शुभNov/6 11:31:26 PMNov/7 00:52:05 AM
अमृतNov/7 00:52:05 AMNov/7 02:12:43 AM
चलNov/7 02:12:43 AMNov/7 03:33:22 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌅 पिछला सूर्योदय
Oct 31
04:58:54
🌅 सूर्योदय
Nov 1
04:58:08
🌘 तिथि शुरू
Nov 1
15:35:43
🌇 सूर्यास्त
Nov 1
18:05:18
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 2
04:57:24
🌒 तिथि समाप्त
Nov 2
15:41:42
इस दिन का पंचांग · Brisbane
🌓 तिथि
द्वादशी
⭐ नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी
🔯 योग
वैधृति
About

धनतेरस

धनतेरस, धन और तेरस (तेरहवीं तिथि) से मिलकर बना है, और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है -- दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित अमांत मास गणना के अनुसार आश्विन कृष्ण त्रयोदशी, और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी -- और यह पाँच दिवसीय दिवाली उत्सव के आरंभ का प्रतीक है। यह एक साथ भगवान धन्वंतरि की जयंती (जन्मदिवस) भी है, देवताओं के वैद्य जो समुद्र मंथन से अमृत का कलश और आयुर्वेद का ज्ञान लेकर प्रकट हुए थे।

इस संध्या, लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (संध्या के धुंधलके) में की जाती है: जब माना जाता है कि देवी समृद्ध और जगमगाते घरों में पधारती हैं। उनका स्वागत करने के लिए घरों की गहन सफ़ाई की जाती है और दीयों तथा रंगोली से सजाया जाता है। प्रदोष काल का समय (सूर्यास्त के बाद परंतु रात्रि होने से पहले) अत्यंत महत्वपूर्ण है: माना जाता है कि इसी अवधि में पूजा करने से पूरे वर्ष के लिए लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

धनतेरस भारत में सोने-चाँदी की खरीद का सबसे बड़ा दिन है। इस दिन बहुमूल्य धातुएँ, ताँबे के बर्तन, या नए पात्र खरीदना निरंतर समृद्धि लाने वाला माना जाता है। यह परंपरा एक कथा से जुड़ी है जिसमें एक युवा राजा का विवाह के चौथे दिन मरना निश्चित था: उसकी वधू ने शयनकक्ष के द्वार के चारों ओर सोना-चाँदी बिछाकर और रातभर गीत गाकर मृत्यु को मात दे दी, जिससे यमराज बिना प्रवेश किए ही लौट गए।

Tradition & Practice
🏅
धनतेरस की खरीदारी
धनतेरस पर सोना, चाँदी, पीतल, या ताँबे की वस्तुएँ खरीदना सबसे लोकप्रिय आधुनिक परंपरा है। एक चाँदी का सिक्का या छोटा बर्तन खरीदना भी लक्ष्मी का आशीर्वाद आमंत्रित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
⚕️
धन्वंतरि जयंती
भगवान धन्वंतरि (चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता) का इस दिन सम्मान किया जाता है। डॉक्टर, फार्मासिस्ट, और आयुर्वेद वैद्य ब्रह्मांड के दिव्य वैद्य के रूप में उनकी पूजा करते हैं।
🕯️
प्रदोष काल पूजा
लक्ष्मी पूजा का समय प्रदोष काल पर रखना अनिवार्य है: सूर्यास्त के बाद की संध्या धुंधलके की अवधि। इस अवधि में देवी पृथ्वी पर जगमगाते, स्वच्छ, और स्वागतयोग्य घरों की तलाश में विचरण करती हैं।
💀
यम दीपम
धनतेरस की रात, असामयिक मृत्यु को दूर रखने के लिए घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) की ओर मुख करके एक दीपक रखा जाता है। परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा के लिए यमराज को एक छोटी प्रार्थना अर्पित की जाती है।
🎁
उपहार और नई वस्तुएँ
परिवार परंपरागत रूप से धनतेरस पर नए बर्तन, उपकरण, या वाहन खरीदते हैं। मूल सिद्धांत यह है: आज जो भी प्राप्त किया जाता है, वह बढ़ता है और घर में बना रहता है, ऐसा माना जाता है।
🌺
रंगोली और दीये
दीयों (तेल के दीपकों) की पंक्तियाँ दहलीज़ों, खिड़कियों, और छतों पर सजाई जाती हैं। प्रवेश द्वार पर सोने और लाल रंग में भव्य रंगोली बनाई जाती है: लक्ष्मी को भीतर आने का एक दृश्यमान निमंत्रण।
शास्त्री जी से पूछें
📅 धनतेरस 1964 कब है? ⏰ धनतेरस मुहूर्त 📖 November 1, 1964 का पंचांग 💬 पंचांग चैट खोलें

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