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दिवाली 2134: Mumbai, Maharashtra

पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण अमावस्या और अमावस्यांत आश्विन अमावस्या: दीपों का पर्व

📍 Mumbai, Maharashtra, India
‹ 2134 ›
दिवाली · 2134
📍 Mumbai, Maharashtra, India
November 15, 2134
पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण अमावस्या और अमावस्यांत आश्विन अमावस्या: दीपों का पर्व
Diwali Week, Day by Day · Mumbai
🏅
धनतेरस
🗓 November 13, 2134
🔔 यम दीप दान, 🔱 प्रदोष, शनि प्रदोष
🕉 प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ (वृषभ स्थिर लग्न): Nov/13 06:14:52 PM – Nov/13 08:15:39 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ: वृषभ स्थिर लग्न
Nov/13 06:14:52 PM
समाप्त Nov/13 08:15:39 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 12
06:45:11 AM
🌅 सूर्योदय
Nov 13
06:45:43 AM
🌘 त्रयोदशी शुरू
Nov 13
04:37:48 PM
🌇 सूर्यास्त
Nov 13
06:00:11 PM
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 14
06:46:15 AM
🌘 त्रयोदशी समाप्त
Nov 14
01:52:57 PM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌑
काली चौदस
🗓 November 14, 2134
🔔 मास शिवरात्रि
🕉 निशीथ काल (काली पूजा): Nov/14 11:57:48 PM – Nov/15 12:48:56 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
निशीथ काल (काली पूजा)
Nov/14 11:57:48 PM
समाप्त Nov/15 12:48:56 AM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 13
06:45:43 AM
🌅 सूर्योदय
Nov 14
06:46:15 AM
🌘 चतुर्दशी शुरू
Nov 14
01:52:57 PM
🌇 सूर्यास्त
Nov 14
05:59:56 PM
🕛 Midnight Muhurta
Nov 14
11:57:48 PM – Nov 15, 12:48:56 AM
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 15
06:46:48 AM
🌑 चतुर्दशी समाप्त
Nov 15
11:15:21 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🪔
नरक चतुर्दशी
🗓 November 15, 2134
🔔 दीपावली, अमावस्या तर्पण
🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 06:44:59 AM – 06:46:48 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय)
06:44:59 AM
समाप्त 06:46:48 AM
🌘 चतुर्दशी शुरू
Nov 14
01:52:57 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 15
06:46:48 AM
🌑 चतुर्दशी समाप्त
Nov 15
11:15:21 AM
🌅 सूर्योदय
Nov 16
06:47:21 AM
🌙 चंद्रोदय
Nov 16
07:48:47 AM
🌇 सूर्यास्त
Nov 16
05:59:29 PM
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 17
06:47:55 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
✨
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
🗓 November 15, 2134
🔔 नरक चतुर्दशी
🕉 प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ (वृषभ स्थिर लग्न): Nov/15 06:07:00 PM – Nov/15 08:07:47 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
प्रदोष काल स्थिर लग्न के साथ: वृषभ स्थिर लग्न
Nov/15 06:07:00 PM
समाप्त Nov/15 08:07:47 PM
निशीथ काल स्थिर लग्न के साथ (मध्यरात्रि): सिंह स्थिर लग्न
Nov/16 12:33:38 AM
समाप्त Nov/16 12:49:07 AM
चोपड़ा पूजन (नई बहीखाता)
Nov/15 06:07:00 PM
समाप्त Nov/15 08:07:47 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 14
06:46:15 AM
🌅 सूर्योदय
Nov 15
06:46:48 AM
🌑 अमावस्या शुरू
Nov 15
11:15:21 AM
🌇 सूर्यास्त
Nov 15
05:59:42 PM
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 16
06:47:21 AM
🌒 अमावस्या समाप्त
Nov 16
08:52:38 AM
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकNov/15 07:03:45 AMNov/15 09:17:50 AM
कुंभNov/15 01:11:42 PMNov/15 02:48:03 PM
वृषभNov/15 06:07:00 PMNov/15 08:07:47 PM
चौघड़ियासेतक
अमृतNov/15 06:46:48 AMNov/15 08:10:55 AM
शुभNov/15 09:35:01 AMNov/15 10:59:08 AM
लाभNov/15 03:45:07 PMNov/15 04:35:35 PM
अमृतNov/15 04:35:35 PMNov/15 05:59:42 PM
चलNov/15 05:59:42 PMNov/15 07:35:39 PM
लाभNov/15 10:47:34 PMNov/16 12:23:31 AM
शुभNov/16 01:59:29 AMNov/16 03:35:26 AM
अमृतNov/16 03:35:26 AMNov/16 05:11:24 AM
चलNov/16 05:11:24 AMNov/16 06:47:21 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
📒
बलि प्रतिपदा
🗓 November 16, 2134
🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
🕉 लाभ चौघड़िया (मिति मुहूर्त): Nov/16 10:59:24 AM – Nov/16 12:23:25 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकNov/16 06:59:49 AMNov/16 09:13:54 AM
कुंभNov/16 01:07:46 PMNov/16 02:44:07 PM
वृषभNov/16 06:03:04 PMNov/16 08:03:51 PM
चौघड़ियासेतक
लाभNov/16 10:59:24 AMNov/16 12:23:25 PM
लाभNov/16 07:35:32 PMNov/16 09:11:35 PM
शुभNov/16 10:47:39 PMNov/17 12:23:42 AM
अमृतNov/17 12:23:42 AMNov/17 01:59:45 AM
चलNov/17 01:59:45 AMNov/17 03:35:48 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
👫
यम द्वितीया / भैया दूज
🗓 November 17, 2134
🔔 गुजराती नव वर्ष, कांची महापेरियवा अनुषम
🕉 अपराह्न काल: Nov/17 01:30:44 PM – Nov/17 03:45:01 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अपराह्न काल
Nov/17 01:30:44 PM
समाप्त Nov/17 03:45:01 PM
चौघड़ियासेतक
लाभNov/17 06:47:55 AMNov/17 08:11:50 AM
चलNov/17 03:11:27 PMNov/17 04:35:22 PM
लाभNov/17 04:35:22 PMNov/17 05:59:17 PM
शुभNov/17 07:35:26 PMNov/17 09:11:35 PM
अमृतNov/17 09:11:35 PMNov/17 10:47:44 PM
चलNov/17 10:47:44 PMNov/18 12:23:53 AM
लाभNov/18 03:36:11 AMNov/18 05:12:20 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌅 पिछला सूर्योदय
Nov 14
06:46:15 AM
🌅 सूर्योदय
Nov 15
06:46:48 AM
🌘 तिथि शुरू
Nov 15
11:15:21 AM
🌇 सूर्यास्त
Nov 15
05:59:42 PM
🌅 अगला सूर्योदय
Nov 16
06:47:21 AM
🌒 तिथि समाप्त
Nov 16
08:52:38 AM
इस दिन का पंचांग · Mumbai
🌓 तिथि
चतुर्दशी
⭐ नक्षत्र
स्वाती
🔯 योग
आयुष्मान
About

दिवाली

दिवाली (दीपावली, "दीपों की पंक्ति") हिंदू जगत का सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है, जो अमावस्या यानी अमावस की रात को पड़ता है -- दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित अमांत मास गणना के अनुसार आश्विन अमावस्या, और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या। एक ही रात में अमावस्या का अंधकार लाखों मिट्टी के दीयों, बिजली की रोशनी, आतिशबाज़ी, और हर घर के देवी लक्ष्मी को अपने जीवन में आमंत्रित करने के सामूहिक संकल्प से पूरी तरह उलट जाता है।

इस पर्व की सबसे प्रचलित कथा है 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी और रावण पर उनकी विजय। अयोध्यावासियों ने अमावस्या के अंधकार में उनका स्वागत करने के लिए दीपों की पंक्तियाँ (दीपावली) जलाईं। दक्षिण भारत में यह दिन कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध (अंधकार के असुर) और उसके बंदीगृह से 16,100 स्त्रियों की मुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस रात काली पूजा की जाती है।

इस पर्व का मुख्य अनुष्ठान लक्ष्मी पूजा है, जो परंपरा के अनुसार प्रदोष काल (संध्या का धुंधलका) या निशीथ काल (मध्यरात्रि) में की जाती है। धन और शुभता की देवी को एक तनिक भी मैल रहित, दीपों से जगमगाते घर में आमंत्रित किया जाता है। व्यापारी परिवारों में नए बही-खाते, सोना, चाँदी, और उपहार उनकी प्रतिमा के सामने रखे जाते हैं। पूजा के बाद प्रसाद वितरण, आतिशबाज़ी, और पड़ोसियों के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात्।।
Namaste sarva-devanam varada-si Haripriye, ya gatistvatprapannanam sa me bhuyat tvadarchanat.
"Salutations, O beloved of Hari, who grants boons to all the gods: may I attain the same liberation that your devotees attain through worship of you."
Lakshmi Ashtottara
Tradition & Practice
🪔
प्रदोष काल पूजा
लक्ष्मी पूजा का समय प्रदोष काल (संध्या का धुंधलका) रखा जाता है, जब देवी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। कुछ परंपराओं में निशीथ काल (मध्यरात्रि) का प्रयोग होता है: पंचांग का समय ही यह तय करता है कि कौन-सा मुहूर्त शुभ है।
🏠
सफ़ाई और दीपसज्जा
लक्ष्मी के आगमन से पहले कई दिनों तक घरों की गहन सफ़ाई की जाती है: अव्यवस्था, जाले, और धूल का पूरी तरह सफ़ाया होना चाहिए। हर कमरे, दहलीज़, और बालकनी को दीयों और रंगीन रोशनी से सजाया जाता है।
🎆
आतिशबाज़ी
दिवाली की रात पटाखे फोड़ने की परंपरा मूलतः ध्वनि और प्रकाश के माध्यम से बुरी आत्माओं को दूर भगाने के लिए थी। आधुनिक प्रचलन में रासायनिक पटाखों की जगह पर्यावरण-अनुकूल दीयों को अधिकाधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
🍬
मिठाई और उपहार
दिवाली भारत का सबसे बड़ा उपहार-मौसम है। परिवारों, मित्रों, और सहकर्मियों के बीच मिठाइयों और मेवों के डिब्बों का आदान-प्रदान होता है। लोकप्रिय मिठाइयों में काजू कतली, लड्डू, बर्फ़ी, और गुलाब जामुन शामिल हैं।
📒
नए बही-खाते
गुजराती और मराठी व्यापारी परंपराओं में, दिवाली की रात नए बही-खातों (चोपड़ा पूजन) को पवित्र किया जाता है: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाले नए वित्तीय वर्ष का आशीर्वाद लेने के लिए।
🌸
दिवाली के पाँच दिन
यह पर्व पाँच दिनों तक फैला रहता है: धनतेरस → काली चौदस → दिवाली → गोवर्धन पूजा/बलिप्रतिपदा → भाई दूज। प्रत्येक दिन का अपना अनुष्ठान, देवता, और क्षेत्रीय रंग होता है।
शास्त्री जी से पूछें
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