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ॐ

परमा एकादशी 1992

अधिक मास कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत (पुरुषोत्तम)

📍 बेंगलुरु, भारत
परमा एकादशी 1992
इस वर्ष या शहर के लिए तारीख उपलब्ध नहीं है।
परिचय

परमा एकादशी

यह एकादशी अधिक या पुरुषोत्तम मास, अर्थात अतिरिक्त चांद्र मास, के कृष्ण पक्ष में पड़ती है। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एक निर्धन किंतु धर्मात्मा ब्राह्मण सुमेधा के विषय में बताया, जो कांपिल्य नगर में अपनी पतिव्रता पत्नी पवित्रा के साथ रहते थे।

किसी पूर्व कर्म के कारण उनके पास लगभग कुछ भी नहीं था, फिर भी पवित्रा निष्ठा से अपने पति की सेवा करती थीं और अपना भोजन अतिथियों को दे देती थीं। एक दिन महर्षि कौंडिन्य उनके घर आए। उन्होंने ऋषि का सत्कार किया और पूछा कि वे निर्धनता से कैसे मुक्त हो सकते हैं। ऋषि ने उन्हें अतिरिक्त मास की परमा एकादशी के विषय में बताया, जो सभी पापों और निर्धनता के दुःख को दूर करती है, और कहा कि इसका पालन करके कुबेर और राजा हरिश्चंद्र को आशीर्वाद मिला था।

सुमेधा और पवित्रा ने एकादशी और उसके बाद के पाँच दिन का उपवास भी किया। शीघ्र ही स्वप्न में मार्गदर्शन पाकर एक राजकुमार ने उन्हें घर, गायें और एक गाँव दिया। वे सुख और भक्ति में रहे और अंत में भगवान के धाम को प्राप्त हुए।

परंपरा और विधि
🗓️
अतिरिक्त मास
यह केवल अधिक या पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
🏠
निर्धनता से मुक्ति
इस व्रत से सुमेधा और पवित्रा को घर और धन का आशीर्वाद मिला।
5️⃣
पाँच दिन का उपवास
कुछ भक्त इस एकादशी के बाद पाँच दिन का उपवास भी करते हैं।
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