Kartika Shukla Ekadashi: the fast dedicated to Lord Vishnu, with Tulasi
कार्तिक शुक्ल की इस एकादशी को भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से आरंभ हुई चार मास की योगनिद्रा से जागते हैं, और चातुर्मास्य समाप्त होता है। इसे प्रबोधिनी या हरिबोधिनी, अर्थात हरि का जागरण, कहते हैं।
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वह महिमा सुनाई जो कभी ब्रह्मा ने नारद को बताई थी। ब्रह्मा ने कहा कि इस दिन का एक उपवास एक हज़ार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञों का पुण्य देता है, और हरि के भजनों और कथाओं के साथ एक रात का जागरण अनेक जन्मों के पापों को जला देता है।
ब्रह्मा ने तुलसी को विशेष स्थान दिया: कार्तिक में विष्णु को उनके पत्ते अर्पित करना, और उनके दर्शन, स्पर्श, सिंचन, रोपण और पूजन द्वारा उनकी सेवा करना स्थायी पुण्य देता है। इसी दिन से तुलसी और विष्णु का विवाह, तुलसी विवाह, मनाया जाता है, और विवाह जैसे मंगल कार्य फिर से आरंभ होते हैं।
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