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ॐ

रमा एकादशी 2202

आश्विन कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित व्रत

📍 बेंगलुरु, भारत
रमा एकादशी · 2202
📍 बेंगलुरु, भारत
नवम्बर 11, 2202
आश्विन कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित व्रत
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:17:15 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
05:49:47 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
नवम्बर 10
06:16:53 पूर्वाह्न
🌙 एकादशी प्रारंभ
नवम्बर 10
11:00:08 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
नवम्बर 11
06:17:15 पूर्वाह्न
🌙 एकादशी समाप्त
नवम्बर 11
12:30:59 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
नवम्बर 11
05:49:47 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 12
06:17:38 पूर्वाह्न
परिचय

रमा एकादशी

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को धर्मात्मा राजा मुचुकुंद के विषय में बताया, जिनके राज्य में सभी एकादशी का व्रत करते थे। उनकी पुत्री चंद्रभागा का विवाह शोभन से हुआ, जो सौम्य किंतु दुर्बल राजकुमार थे।

शोभन इस एकादशी से ठीक पहले अपने ससुर के घर आए। दुर्बल होते हुए भी उन्होंने सबके साथ उपवास करने का संकल्प लिया, और भोर से पहले उनकी मृत्यु हो गई। व्रत के पुण्य से वे मंदराचल पर्वत पर एक भव्य दिव्य नगर के स्वामी के रूप में पुनः जन्मे, किंतु वह नगर स्थिर नहीं था, क्योंकि उनका उपवास पूर्ण श्रद्धा से नहीं किया गया था।

एक तीर्थयात्री ब्राह्मण ने उन्हें वहाँ देखा और यह समाचार चंद्रभागा तक पहुँचाया। ऋषि वामदेव का आशीर्वाद पाकर वे अपने पति के पास गईं और बचपन से किए गए सभी एकादशी व्रतों का पुण्य उन्हें अर्पित कर दिया। नगर स्थायी हो गया, और दोनों वहाँ साथ साथ रहने लगे। रमा एकादशी दीपावली से कुछ दिन पहले पड़ती है और लक्ष्मी से जुड़ी है।

परंपरा और विधि
💑
चंद्रभागा का दान
उनके जीवन भर के एकादशी पुण्य ने उनके पति के दिव्य नगर को स्थायी बना दिया।
🏔️
मंदराचल पर नगर
शोभन के निष्ठापूर्ण उपवास ने उन्हें पर्वत पर एक दिव्य नगर दिलाया।
🪔
दीपावली से पहले
दीपावली से ठीक पहले पड़ने के कारण यह देवी लक्ष्मी, अर्थात रमा, से जुड़ी है।
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