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ऋग्वेद उपाकर्म 1932: Delhi, Delhi

ऋग्वेदियों के लिए यज्ञोपवीत के वार्षिक नवीनीकरण की तिथि, आपके शहर के लिए

📍 Delhi, Delhi, India
‹ 1932 ›
ऋग्वेद उपाकर्म · 1932
📍 Delhi, Delhi, India
पुनरावृत्ति
प्रतिवर्ष करने वाला
August 15, 1932
प्रथम बार
उपनयन के बाद
August 7, 1932
ऋग्वेदियों के लिए यज्ञोपवीत के वार्षिक नवीनीकरण की तिथि, आपके शहर के लिए
Rigveda Upakarma Dates · Delhi
पुनरावृत्ति
August 15, 1932
Shravana Nakshatra
प्रथम बार
August 7, 1932
Hasta Nakshatra
Guru Modhyami begins Aug 11, 1932, ends at Sep 7, 1932
🌅 पिछला सूर्योदय
Aug 14
05:50:43
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
Aug 15
00:34:09
🌅 सूर्योदय
Aug 15
05:51:15
🌇 सूर्यास्त
Aug 15
19:00:16
⭐ नक्षत्र समाप्त
Aug 16
00:30:25
🌅 अगला सूर्योदय
Aug 16
05:51:48
☀️ संक्रांति
Aug 16
05:57:49

उपाकर्म के 48 घंटों के भीतर ग्रहण या संक्रांति

About

ऋग्वेद उपाकर्म

ऋग्वेद उपाकर्म यज्ञोपवीत (पवित्र जनेऊ) का वार्षिक नवीनीकरण है, जो ऋग्वेद अनुयायी परिवारों द्वारा मनाया जाता है, और परंपरागत रूप से श्रावण शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र पर आधारित होता है।

कालतत्त्व-विवेचन के संग्रहीत श्लोकों के अनुसार, मुख्य समय श्रवण नक्षत्र है; यदि यह उपलब्ध न हो या ग्रहण, संक्रांति, अथवा गुरु/शुक्र अस्त से बाधित हो, तो अगला विकल्प पंचमी तिथि है, फिर हस्त नक्षत्र -- और यदि इनमें से कोई भी श्रावण मास में संभव न हो, तो यही क्रम भाद्रपद शुक्ल पक्ष में पुनः आज़माया जाता है।

नीचे दी गई तालिका में गणना की गई तिथि दिखाई गई है -- उन दोनों के लिए जो इस व्रत को प्रतिवर्ष दोहराते हैं और उनके लिए भी जो पहली बार इसे कर रहे हैं।

Tradition & Practice
⭐
श्रवण नक्षत्र पर आधारित
मुख्य समय श्रावण शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र है।
🕉️
तीन समय विकल्प
श्रवण नक्षत्र, पंचमी तिथि, और हस्त नक्षत्र, इसी प्राथमिकता क्रम में।
📅
श्रावण, फिर भाद्रपद
यदि तीनों में से कोई भी श्रावण मास में उपयुक्त न हो, तो यही क्रम भाद्रपद शुक्ल पक्ष में पुनः आज़माया जाता है।
शास्त्री जी से पूछें
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