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ॐ

षटतिला एकादशी 1894

Pausha Krishna Ekadashi: the fast dedicated to Lord Vishnu

📍 Bangalore, India
‹ 1894 ›
षटतिला एकादशी · 1894
📍 Bangalore, India
फरवरी 1, 1894
Pausha Krishna Ekadashi: the fast dedicated to Lord Vishnu
समय · Bangalore
सूर्योदय
06:38:19 AM
सूर्यास्त
06:11:11 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
जनवरी 31
06:38:28 AM
🌙 एकादशी प्रारंभ
जनवरी 31
03:36:11 PM
🌅 सूर्योदय
फरवरी 1
06:38:19 AM
🌇 सूर्यास्त
फरवरी 1
06:11:11 PM
🌙 एकादशी समाप्त
फरवरी 1
06:12:52 PM
🌅 अगला सूर्योदय
फरवरी 2
06:38:10 AM
परिचय

षटतिला एकादशी

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वह कथा सुनाई जो सबसे पहले महर्षि पुलस्त्य ने दाल्भ्य को सुनाई थी। एक धर्मपरायण ब्राह्मणी बड़ी कठोरता से अनेक उपवास और व्रत करती थी, किंतु वह कभी दान में अन्न नहीं देती थी।

उसकी परीक्षा लेने के लिए श्रीकृष्ण भिक्षुक बनकर उसके द्वार पर भिक्षा माँगने आए। चिढ़कर उसने उनके पात्र में मिट्टी का एक ढेला डाल दिया। मृत्यु के बाद उसकी तपस्या उसे एक स्वर्गीय घर तक ले गई, किंतु उसने उसे खाली पाया, जिसमें न अन्न था न धन। भगवान ने उसे इसका कारण बताया, और कहा कि जब दिव्य स्त्रियाँ उससे मिलने आएँ, तब वह उनसे षटतिला एकादशी के विषय में पूछे। उसने उनसे इसकी कथा सुनी, उपवास किया, और उसका घर अन्न और धन से भर गया।

इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग होता है: उससे स्नान, उसे शरीर पर मलना, पवित्र अग्नि में उसकी आहुति, तिल जल का अर्पण, उसका दान, और उसे खाना।

परंपरा और विधि
🌰
तिल के छह प्रयोग
इस दिन तिल से स्नान, उबटन, होम, तर्पण, दान और तिल का भोजन।
🍚
दान का महत्व
ब्राह्मणी का स्वर्गीय घर खाली था क्योंकि उसने कभी अन्न दान नहीं किया था।
🧘
पुलस्त्य से दाल्भ्य तक
महर्षि पुलस्त्य ने सबसे पहले यह व्रत दाल्भ्य को बताया था।
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