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ॐ

शुक्रवार व्रत 2011

महालक्ष्मी का शुक्रवार व्रत: श्रावण शुक्ल पक्ष का शुक्रवार, सूर्य कर्क में

📍 बेंगलुरु, भारत
इस वर्ष श्रावण शुक्ल के शुक्रवार · बेंगलुरु
🪷
श्रावण शुक्ल शुक्रवार: व्रत आरंभ करें
🗓 शुक्रवार, 5 अगस्त 2011
🌅 सूर्योदय: 06:06:59 AM
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श्रावण शुक्ल शुक्रवार: व्रत आरंभ करें
🗓 शुक्रवार, 12 अगस्त 2011
🌅 सूर्योदय: 06:08:05 AM
परिचय

शुक्रवार व्रत

शुक्रवार व्रत, व्रतराज का शुक्रवार का व्रत, भविष्योत्तर पुराण का महालक्ष्मी का वरलक्ष्मी व्रत है। यह श्रावण शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को, जब सूर्य कर्क में हों, आरंभ किया जाता है, जैसे गंगा-यमुना के संगम या तुंगभद्रा के तट पर। ग्रंथ किसी विशेष शुक्रवार का नाम नहीं लेता।

व्रत कैसे करें

  • घर को तोरण और रंगोली से सजाएँ। पूर्व दिशा में, उत्तम ईशान कोण में, चावल फैलाकर कमल बनाएँ और उस पर तीर्थजल, फल, सोना और पाँच पत्तों वाला वस्त्र से ढका कलश रखें। उस पर लक्ष्मी की चतुर्भुज सोने की प्रतिमा स्थापित करें।
  • प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएँ और देवी सूक्त से अभिषेक करें। सोलह उपचारों से पूजा करें: अष्टगंध, पीपल, बड़, बेल, आम, मालती और अनार के इक्कीस-इक्कीस पत्ते, मालती आदि फूल, मंगलसूत्र और सौभाग्य द्रव्य (हल्दी, कुंकुम, सिंदूर, काजल)। खीर, अनेक व्यंजन और इक्कीस पुए का भोग लगाएँ।
  • पवित्र दोरक बाँधें और प्रार्थना करें: श्रियं देहि यशो देहि सौभाग्यं देहि मे शुभे।
  • पाँच वायन दें: फल, अन्न, दक्षिणा और शक्कर-घी की इक्कीस मिठाइयों से भरे बाँस के पात्र, एक-एक ब्राह्मण, यति, देवी, ब्रह्मचारी और सुहागिन को। मौन रहकर पाँच आरतियाँ करें और कथा सुनें।
  • परीक्षा: बिना चूने के पान के साथ सुपारी चबाएँ, कपड़े में बाँधकर सुबह देखें। लाल हो गई हो तो यह उत्तम व्रत करें; न हुई हो तो समृद्धि चाहने वाला इसे न करे।

भोजन कब करें

  • व्रतराज इस व्रत के लिए उपवास या भोजन का कोई नियम नहीं देता।

भविष्योत्तर पुराण से चित्रनेमि की कथा

कैलास पर शिव और पार्वती चौसर खेल रहे थे और दोनों अपनी जीत बताने लगे। निर्णय के लिए पूछे जाने पर गण चित्रनेमि ने शिव के पक्ष में झूठ कहा, और पार्वती ने उसे कोढ़ी होने का शाप दिया। शिव के विनती करने पर पार्वती पसीजीं: जब वह किसी सुंदर सरोवर पर दिव्य स्त्रियों को पवित्र व्रत करते देखेगा, तब शाप छूटेगा।

उस सरोवर पर कोढ़ी होकर रहते हुए चित्रनेमि ने अप्सराओं को पूजा करते देखा और उनसे पूछा; उन्होंने उसे वरलक्ष्मी व्रत बताया। केवल उनकी पूजा अंत तक देखने, धूप सूँघने और घी का दीपक देखने से उसका कोढ़ छूट गया और वह सोने जैसा चमकने लगा। उसने सोने की प्रतिमा बनाकर पूजा की, पाँच वायन दिए, पान की परीक्षा की और लाल होने पर व्रत किया।

वह कैलास लौटा, पार्वती ने उसे अपना पुत्र मान लिया और शिव ने उसे कैलास और बाद में वैकुंठ के सुख दिए। स्वयं पार्वती ने यह व्रत करके षण्मुख को पाया; नंद और विक्रमादित्य ने इससे राज्य पाया, और नंद की पत्नी ने पुत्र के लिए इसे करके तीनों लोकों को धारण करने में समर्थ पुत्र पाया।

यदा रवौ कुलीरस्थे मासे च श्रावणे तथा। गङ्गायमुनयोर्योगे तुङ्गभद्रासरित्तटे॥
तस्मिन्वै श्रावणे मासि शुक्लपक्षे भृगोर्दिने। प्रारब्धव्यं व्रतं तत्र महालक्ष्म्या यतात्मभिः॥
"जब सूर्य कर्क में हो और श्रावण मास हो, गंगा और यमुना के संगम पर या तुंगभद्रा के तट पर, उस श्रावण के शुक्ल पक्ष में शुक्रवार को, संयमी व्यक्ति महालक्ष्मी का व्रत आरंभ करे।"
भविष्योत्तर पुराण, वरलक्ष्मी व्रत 12-14 (व्रतराज)
आरक्तं यदि जायेत कुर्याद्व्रतमनुत्तमम्। नोचेन्न तद्व्रतं कार्यं सर्वथा भूतिमिच्छता॥
"यदि वह लाल हो जाए तो यह उत्तम व्रत रखें; यदि नहीं, तो समृद्धि चाहने वाला इसे बिल्कुल न रखे।"
भविष्योत्तर पुराण, वरलक्ष्मी व्रत (व्रतराज)
श्रियं देहि यशो देहि सौभाग्यं देहि मे शुभे।
"हे मंगलमयी, मुझे समृद्धि दो, यश दो, सौभाग्य दो।"
डोरक बाँधते समय की प्रार्थना (व्रतराज)
परंपरा और विधि
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भविष्योत्तर पुराण
व्रतराज का शुक्रवार का व्रत महालक्ष्मी का वरलक्ष्मी व्रत है, जो सूत ने ऋषियों को बताया।
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श्रावण शुक्ल का शुक्रवार
सूर्य के कर्क में रहते श्रावण शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को आरंभ; कोई विशेष शुक्रवार नहीं बताया।
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पान की परीक्षा
बिना चूने के चबाया पान-सुपारी, कपड़े में बँधा, सुबह तक लाल हो जाए: तब व्रत किया जाता है।
🙏
फल
इस जीवन में बड़े सुख और अंत में शिवपुर; कथा सुनने से धन और अन्न।
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