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उपाकर्म 1908: जयपुर, राजस्थान
आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ
📍
जयपुर, राजस्थान, भारत
उपाकर्म · 1908
📍 जयपुर, राजस्थान, भारत
ऋग्वेद उपाकर्म
अगस्त 2, 1908
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शुक्ल यजुर्वेद
यजुर् उपाकर्म
सितम्बर 10, 1908
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कृष्ण यजुर्वेद (बौधायन) (वैष्णव)
यजुर् उपाकर्म
सितम्बर 10, 1908
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कृष्ण यजुर्वेद (आपस्तम्ब) (वैष्णव)
यजुर् उपाकर्म
सितम्बर 10, 1908
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कृष्ण यजुर्वेद (हिरण्यकेशी) (वैष्णव)
यजुर् उपाकर्म
अगस्त 30, 1908
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कृष्ण यजुर्वेद (स्मार्त)
यजुर् उपाकर्म
अगस्त 12, 1908
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सामवेद उपाकर्म
पुनरावृत्ति
अगस्त 30, 1908
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सामवेद उपाकर्म
प्रथम बार
अगस्त 2, 1908
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सामवेद उपाकर्म (तमिल सम्प्रदाय)
अगस्त 30, 1908
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आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ
उपाकर्म तिथियाँ · जयपुर
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अगस्त 2, 1908
Panchami Tithi
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 10
05:56:32 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अगस्त 11
05:57:03 पूर्वाह्न
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
अगस्त 11
08:29:07 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 11
07:07:03 अपराह्न
⭐ नक्षत्र समाप्त
अगस्त 12
05:32:20 पूर्वाह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 12
05:57:33 पूर्वाह्न
यजुर् उपाकर्म पूरा पृष्ठ →
शुक्ल यजुर्वेद
सितम्बर 10, 1908
भाद्रपद पूर्णिमा
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद, बौधायन सूत्र
पुनरावृत्ति
सितम्बर 10, 1908
भाद्रपद पूर्णिमा
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद (स्मार्त): अगस्त 12, 1908
प्रथम बार
सितम्बर 10, 1908
भाद्रपद पूर्णिमा
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद, आपस्तम्ब सूत्र
पुनरावृत्ति
सितम्बर 10, 1908
भाद्रपद पूर्णिमा
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद (स्मार्त): अगस्त 12, 1908
प्रथम बार
सितम्बर 10, 1908
भाद्रपद पूर्णिमा
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद, हिरण्यकेशी सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 30, 1908
हस्त नक्षत्र, भाद्रपद
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
कृष्ण यजुर्वेद (स्मार्त): अगस्त 12, 1908
प्रथम बार
अगस्त 30, 1908
हस्त नक्षत्र, भाद्रपद
चतुर्दशी सूर्योदय से 9 मुहूर्त से अधिक व्याप्त है
गायत्री जप
अगस्त 12, 1908
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 11
05:57:03 पूर्वाह्न
🌕 पूर्णिमा शुरू
अगस्त 11
02:18:13 अपराह्न
🌅 सूर्योदय
अगस्त 12
05:57:33 पूर्वाह्न
🌖 पूर्णिमा समाप्त
अगस्त 12
10:28:40 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 12
07:06:14 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 13
05:58:02 पूर्वाह्न
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सामवेद उपाकर्म
पुनरावृत्ति
अगस्त 30, 1908
भाद्रपद हस्त नक्षत्र
प्रथम बार
अगस्त 2, 1908
श्रावण पंचमी
सिंहस्थ गुरु (सिंह राशि में बृहस्पति)
सामवेद उपाकर्म (तमिल सम्प्रदाय)
अगस्त 30, 1908
भाद्रपद हस्त नक्षत्र
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 29
06:05:37 पूर्वाह्न
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
अगस्त 29
03:25:58 अपराह्न
🌅 सूर्योदय
अगस्त 30
06:06:04 पूर्वाह्न
⭐ नक्षत्र समाप्त
अगस्त 30
05:52:04 अपराह्न
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 30
06:49:07 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 31
06:06:31 पूर्वाह्न
परिचय
उपाकर्म
उपाकर्म यज्ञोपवीत का वार्षिक नवीकरण और वेदाध्ययन का पुनरारंभ है। प्रत्येक वेद इसे अपने दिन मनाता है: ऋग्वेद उपाकर्म, यजुर् उपाकर्म (श्रावणी उपाकर्म, आवणि अवित्तम्) और सामवेद उपाकर्म।
ऊपर दी गई तिथियाँ आपके नगर और वर्ष के लिए हैं, अनुष्ठान दोहराने वालों के लिए भी और इसे पहली बार करने वालों के लिए भी। प्रत्येक वेद के पूरे पृष्ठ पर संपूर्ण तालिका दी गई है।
जहाँ विभिन्न संप्रदायों के मत भिन्न हों, वहाँ कृपया अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा का पालन करें।
परंपरा और विधि
ऋग्वेद उपाकर्म
श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र पर आधारित।
यजुर् उपाकर्म
श्रावण पूर्णिमा पर आधारित, शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद के लिए।
सामवेद उपाकर्म
भाद्रपद में हस्त नक्षत्र पर आधारित।
शास्त्री जी से पूछें
पूर्ण शास्त्रीय तर्क पढ़ें
Upākarma Nirṇaya: The Śāstric Determination of the Upākarma Day
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उपाकर्म-निर्णय: उपाकर्म-दिन का शास्त्रीय निर्णय
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