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उपाकर्म 1921: Jersey City, New Jersey

आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ

📍 Jersey City, New Jersey, America (United States)
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उपाकर्म · 1921
📍 Jersey City, New Jersey, America (United States)
आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ
उपाकर्म तिथियाँ · Jersey City

ऋग्वेद उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

अगस्त 17, 1921
Shravana Nakshatra
☀️ संक्रांति
अगस्त 16
12:47:12 AM
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 16
06:08:36 AM
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
अगस्त 16
02:16:27 PM
🌅 सूर्योदय
अगस्त 17
06:09:35 AM
⭐ नक्षत्र समाप्त
अगस्त 17
05:14:08 PM
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 17
07:51:29 PM
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 18
06:10:34 AM

यजुर् उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

शुक्ल यजुर्वेद
अगस्त 17, 1921
श्रावण पूर्णिमा
कृष्ण यजुर्वेद, बौधायन सूत्र
अगस्त 17, 1921
श्रावण पूर्णिमा
स्मार्त: अगस्त 18, 1921
कृष्ण यजुर्वेद, आपस्तम्ब सूत्र
अगस्त 17, 1921
श्रावण पूर्णिमा
स्मार्त: अगस्त 18, 1921
कृष्ण यजुर्वेद, हिरण्यकेशी सूत्र
अगस्त 17, 1921
श्रावण पूर्णिमा
स्मार्त: अगस्त 18, 1921
गायत्री जप
अगस्त 18, 1921
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 17
06:09:35 AM
🌕 पूर्णिमा शुरू
अगस्त 17
09:03:48 AM
🌅 सूर्योदय
अगस्त 18
06:10:34 AM
🌖 पूर्णिमा समाप्त
अगस्त 18
11:27:58 AM
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 18
07:50:04 PM
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 19
06:11:33 AM

सामवेद उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

सामवेद उपाकर्म
पुनरावृत्ति
सितम्बर 3, 1921
भाद्रपद हस्त नक्षत्र
प्रथम बार
परिहार सहित: सितम्बर 3, 1921
इस दिन फिर भी यज्ञोपवीत धारण (जनेऊ बदलना) करें, मानक मंत्र का उच्चारण कर पुराना जनेऊ त्यागें। इससे संध्यावंदन जैसे नित्यकर्म वैध बने रहते हैं, भले ही पूर्ण उपाकर्म शुभ समय पर न हो सके।
निर्णयसिंधु के अनुसार, चूके हुए कर्म के परिहार हेतु उपवास या प्राजापत्य कृच्छ्र करें।
नदी या पवित्र जलाशय में स्नान करें और सरल ऋषि तर्पण अर्पित करें। कहा जाता है कि इससे शेष दोष शुद्ध हो जाता है।
विकल्प (अल्पमत): श्रावण पूर्णिमा: अगस्त 17, 1921
अध्ययन पुनः आरंभ: सितम्बर 3, 1921
🌅 पिछला सूर्योदय
सितम्बर 2
06:25:17 AM
🌅 सूर्योदय
सितम्बर 3
06:26:16 AM
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
सितम्बर 3
01:35:38 PM
🌇 सूर्यास्त
सितम्बर 3
07:25:31 PM
🌅 अगला सूर्योदय
सितम्बर 4
06:27:15 AM
⭐ नक्षत्र समाप्त
सितम्बर 4
11:40:58 AM

उपाकर्म के 48 घंटों के भीतर ग्रहण या संक्रांति

परिचय

उपाकर्म

उपाकर्म यज्ञोपवीत का वार्षिक नवीकरण और वेदाध्ययन का पुनरारंभ है। प्रत्येक वेद इसे अपने दिन मनाता है: ऋग्वेद उपाकर्म, यजुर् उपाकर्म (श्रावणी उपाकर्म, आवणि अवित्तम्) और सामवेद उपाकर्म।

ऊपर दी गई तिथियाँ आपके नगर और वर्ष के लिए हैं, अनुष्ठान दोहराने वालों के लिए भी और इसे पहली बार करने वालों के लिए भी। प्रत्येक वेद के पूरे पृष्ठ पर संपूर्ण तालिका दी गई है।

जहाँ विभिन्न संप्रदायों के मत भिन्न हों, वहाँ कृपया अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा का पालन करें।

परंपरा और विधि
⭐
ऋग्वेद उपाकर्म
श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र पर आधारित।
🌕
यजुर् उपाकर्म
श्रावण पूर्णिमा पर आधारित, शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद के लिए।
🌾
सामवेद उपाकर्म
भाद्रपद में हस्त नक्षत्र पर आधारित।
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