वाल्मीकि जयंती 2017
आश्विन पूर्णिमा: संस्कृत काव्य के जनक महर्षि वाल्मीकि का जन्मदिन
वाल्मीकि जयंती
वाल्मीकि जयंती (जिसे प्रगट दिवस भी कहा जाता है) आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के जन्मदिवस का उत्सव है, जिन्होंने रामायण की रचना की, जो संस्कृत का प्रथम और सबसे महान महाकाव्य है। उनका जन्म आश्विन की पूर्णिमा को हुआ था: वही शरद पूर्णिमा जब चंद्रमा सबसे उज्ज्वल और सुंदर होता है। वाल्मीकि केवल एक कवि के रूप में ही नहीं, बल्कि आदि कवि (प्रथम कवि) के रूप में पूजनीय हैं, जिनकी निरर्थक हिंसा देखकर उत्पन्न व्यथा संसार का प्रथम साहित्यिक श्लोक बनी।
श्लोक (वह संस्कृत छंद रूप जो बाद की लाखों कविताओं, स्तोत्रों और शास्त्रों में प्रयुक्त हुआ) की उत्पत्ति सीधे वाल्मीकि से जुड़ी है। वे तमसा नदी के तट पर टहल रहे थे जब उन्होंने एक बहेलिये को संभोगरत क्रौंच पक्षियों (सारस) की जोड़ी में से एक नर पक्षी को मारते देखा। मादा पक्षी की व्यथा भरी पुकार ने उनके हृदय को बींध दिया और अनायास ही, उनके शोक से पूर्ण अनुष्टुप छंद में प्रथम स्वतःस्फूर्त श्लोक फूट पड़ा: मा निषाद, “हे बहेलिये, तुझे कभी शाश्वत शांति प्राप्त न हो।” उनका शोक कविता में परिवर्तित हो गया था। शोक, श्लोक बन गया था। यही क्षण संस्कृत साहित्य का जन्म माना जाता है।
वाल्मीकि का पूर्व जीवन स्वयं परिवर्तन की एक कथा है। रत्नाकर नाम के एक ब्राह्मण के रूप में जन्मे, वे अपने परिवार का पेट भरने के लिए यात्रियों को लूटने वाले डाकू बन गए। जब उनकी भेंट देवर्षि नारद से हुई और उन्होंने पूछा कि क्या उनका परिवार उनके पाप में भागीदार बनेगा, तो उन्हें पता चला कि परिवार ने इनकार कर दिया, और वे इतने विचलित हुए कि वर्षों तक तपस्या में लीन हो गए, इतने लंबे समय तक कि उनके चारों ओर एक बांबी (वाल्मीक) उग आई। जब वे बाहर निकले, तो वे वाल्मीकि थे: बांबी से जन्मे ऋषि। इसके पश्चात उन्होंने 7 काण्डों में 24,000 श्लोकों वाली रामायण की रचना की, वनवास के दौरान सीता को आश्रय दिया, और राम के जुड़वां पुत्रों लव और कुश को उनके द्वारा रची रामायण गाना सिखाया, जिससे यह कथा संसार तक पहुंच सकी।
चौघड़िया मुहूर्त
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| चल | अक्तूबर/5/2017 10:56:34 AM | अक्तूबर/5/2017 12:08:10 PM |
| लाभ | अक्तूबर/5/2017 12:08:10 PM | अक्तूबर/5/2017 01:37:41 PM |
| शुभ | अक्तूबर/5/2017 04:36:43 PM | अक्तूबर/5/2017 06:06:14 PM |
| अमृत | अक्तूबर/5/2017 06:06:14 PM | अक्तूबर/5/2017 07:36:44 PM |
| चल | अक्तूबर/5/2017 07:36:44 PM | अक्तूबर/5/2017 09:07:13 PM |
| लाभ | अक्तूबर/6/2017 12:08:12 AM | अक्तूबर/6/2017 01:38:42 AM |
| शुभ | अक्तूबर/6/2017 03:09:11 AM | अक्तूबर/6/2017 04:39:40 AM |
| अमृत | अक्तूबर/6/2017 04:39:40 AM | अक्तूबर/6/2017 06:10:10 AM |
| सुगम | अक्तूबर/5/2017 07:39:37 AM – अक्तूबर/5/2017 09:09:08 AM | |
| उत्ती | अक्तूबर/5/2017 10:56:34 AM – अक्तूबर/5/2017 12:08:10 PM | |
| अमृता | अक्तूबर/5/2017 12:08:10 PM – अक्तूबर/5/2017 01:37:41 PM | |
| लाभम | अक्तूबर/5/2017 04:36:43 PM – अक्तूबर/5/2017 06:06:14 PM |
| अमृता | अक्तूबर/5/2017 06:06:14 PM – अक्तूबर/5/2017 07:36:44 PM | |
| लाभम | अक्तूबर/5/2017 10:37:43 PM – अक्तूबर/6/2017 12:08:12 AM | |
| धनम | अक्तूबर/6/2017 12:08:12 AM – अक्तूबर/6/2017 01:38:42 AM | |
| सुगम | अक्तूबर/6/2017 01:38:42 AM – अक्तूबर/6/2017 03:09:11 AM | |
| उत्ती | अक्तूबर/6/2017 04:39:40 AM – अक्तूबर/6/2017 06:10:10 AM |
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