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ॐ

यजुर् उपाकर्म 1915: Sydney, New South Wales

आवनि अवित्तम, यज्ञोपवीत का वार्षिक नवीनीकरण, आपके शहर के लिए

📍 Sydney, New South Wales, Australia
यजुर् उपाकर्म · 1915
📍 Sydney, New South Wales, Australia
अगस्त 24, 1915
आवनि अवित्तम, यज्ञोपवीत का वार्षिक नवीनीकरण, आपके शहर के लिए
यजुर् उपाकर्म तिथियाँ · Sydney
शुक्ल यजुर्वेद
पुनरावृत्ति
अगस्त 24, 1915
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
परिहार सहित: अगस्त 24, 1915
शुक्र अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
कृष्ण यजुर्वेद, बौधायन सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 24, 1915
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
जुलाई 26, 1915
गुरु (आषाढ़) पूर्णिमा
Shukra Modhyami अगस्त 7, 1915 को आरंभ, अक्तूबर 6, 1915 को समाप्त
कृष्ण यजुर्वेद, आपस्तम्ब सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 24, 1915
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
जुलाई 26, 1915
गुरु (आषाढ़) पूर्णिमा
Shukra Modhyami अगस्त 7, 1915 को आरंभ, अक्तूबर 6, 1915 को समाप्त
कृष्ण यजुर्वेद, हिरण्यकेशी सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 24, 1915
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
परिहार सहित: अगस्त 24, 1915
शुक्र अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
गायत्री जप
अगस्त 25, 1915
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 24
06:26:27 पूर्वाह्न
🌕 पूर्णिमा शुरू
अगस्त 24
09:16:51 पूर्वाह्न
🌅 सूर्योदय
अगस्त 25
06:25:15 पूर्वाह्न
🌖 पूर्णिमा समाप्त
अगस्त 25
07:40:03 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 25
05:30:13 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 26
06:24:01 पूर्वाह्न

उपाकर्म के 48 घंटों के भीतर ग्रहण या संक्रांति

  • 🌕 उपछाया चंद्र ग्रहण: सोमवार, जुलाई 26, 1915, 9:05 PM to 11:43 PM AEST · मध्य 10:24 PM · उपाकर्म के पंचांग दिवस में (जुलाई 26, 1915) · इस शहर में चंद्रमा उदित रहेगा
    धर्मशास्त्र में उपछाया ग्रहण का विचार नहीं किया जाता।
  • 🌕 उपछाया चंद्र ग्रहण: बुधवार, अगस्त 25, 1915, 5:44 AM to 9:09 AM AEST · मध्य 7:26 AM · उपाकर्म के 1 पंचांग दिवस बाद (अगस्त 24, 1915) · इस शहर में चंद्रमा उदित रहेगा
    धर्मशास्त्र में उपछाया ग्रहण का विचार नहीं किया जाता।
परिचय

यजुर् उपाकर्म

यजुर्वेद उपाकर्म (जिसे श्रावणी उपाकर्म, और तमिल में आवणि अविट्टम भी कहा जाता है) यज्ञोपवीत (पवित्र जनेऊ) का वार्षिक नवीनीकरण है, जो यजुर्वेद अनुयायी परिवारों द्वारा मनाया जाता है और परंपरागत रूप से श्रावण पूर्णिमा को किया जाता है।

सटीक तिथि प्रतिवर्ष और यजुर्वेद की प्रत्येक शाखा के अनुसार बदल सकती है: शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद की बौधायन तथा आपस्तम्ब सूत्र परंपराओं के अपने-अपने समय-निर्धारण के नियम हैं, और मुख्य दिन ग्रहण, संक्रांति, तथा ग्रहों के अस्त होने के अनुसार तिथि और आगे भी खिसक सकती है।

ऊपर दिए गए कार्ड प्रत्येक शाखा के लिए, आपके शहर और वर्ष हेतु, गणना की गई तिथि दिखाते हैं, उन दोनों के लिए जो इस व्रत को प्रतिवर्ष दोहराते हैं और उनके लिए भी जो पहली बार इसे कर रहे हैं। इन तिथियों के पीछे के पूर्ण शास्त्रीय तर्क के लिए, संलग्न लेख देखें।

उपाकर्म निर्णय (सही तिथि का निर्धारण) वास्तव में जटिल विषय है। सदियों से विभिन्न संप्रदायों और आचार्यों ने अलग-अलग नियम निर्धारित किए हैं, और mypanchang.com पर हमने यहाँ इन दृष्टिकोणों को यथासंभव समाहित करने का प्रयास किया है। इसीलिए कभी-कभी आपको एक ही शाखा के लिए एक से अधिक तिथियाँ दिखाई दे सकती हैं। जहाँ ये भिन्न हों, कृपया अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा का पालन करें।

परंपरा और विधि
🌕
श्रावण पूर्णिमा पर आधारित
सभी शाखाओं के लिए मुख्य समय श्रावण मास की पूर्णिमा है।
🕉️
चार शाखाएँ
शुक्ल यजुर्वेद, तथा कृष्ण यजुर्वेद की बौधायन, आपस्तम्ब और हिरण्यकेशी सूत्र परंपराएँ, प्रत्येक की अपनी वैकल्पिक तिथियाँ हैं।
📖
पूरा तर्क पढ़ें
इन तिथियों के पीछे के शास्त्रीय नियमों को विस्तार से बताने वाला एक लेख नीचे संलग्न है।
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