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ॐ

योगिनी एकादशी 2182

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत

📍 बेंगलुरु, भारत
योगिनी एकादशी · 2182
📍 बेंगलुरु, भारत
जून 26, 2182
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
05:57:30 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
06:48:36 अपराह्न
🌅 पिछला सूर्योदय
जून 25
05:57:15 पूर्वाह्न
🌙 एकादशी प्रारंभ
जून 25
10:43:38 अपराह्न
🌅 सूर्योदय
जून 26
05:57:30 पूर्वाह्न
🌇 सूर्यास्त
जून 26
06:48:36 अपराह्न
🌙 एकादशी समाप्त
जून 26
11:00:09 अपराह्न
🌅 अगला सूर्योदय
जून 27
05:57:45 पूर्वाह्न
परिचय

योगिनी एकादशी

श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को अलका के राजा कुबेर की सेवा में रहने वाले यक्ष हेममाली की कथा सुनाई। उसका दैनिक कर्तव्य कुबेर की शिव पूजा के लिए ताज़े फूल लाना था।

एक दिन अपनी पत्नी के साथ में खोया हेममाली फूल नहीं ला सका। पूजा भंग होने से क्रुद्ध कुबेर ने उसे कुष्ठ रोग से पीड़ित होने और अलका से पृथ्वी पर गिरने का शाप दिया। हेममाली पीड़ा में भटकता हुआ हिमालय में प्राचीन ऋषि मार्कंडेय के आश्रम पहुँचा, और उनके सामने सब कुछ स्वीकार कर लिया।

उसकी सच्चाई से प्रसन्न होकर मार्कंडेय ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने को कहा। हेममाली ने भक्ति से उपवास किया, रोगमुक्त हुआ, और अपना तेजस्वी रूप फिर से पाया। कृष्ण ने घोषित किया कि यह व्रत रखना अठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है और सभी पापों का नाश करता है।

परंपरा और विधि
🌺
हेममाली का उद्धार
इस व्रत से यक्ष का कुष्ठ रोग का शाप दूर हुआ।
🧘
ऋषि मार्कंडेय
चिरयुवा ऋषि ने पश्चात्ताप करते हेममाली को उपाय बताया।
🍚
महान पुण्य
कहा जाता है कि इसे रखना अठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है।
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