Jyeshtha Krishna Ekadashi: the fast dedicated to Lord Vishnu
श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को अलका के राजा कुबेर की सेवा में रहने वाले यक्ष हेममाली की कथा सुनाई। उसका दैनिक कर्तव्य कुबेर की शिव पूजा के लिए ताज़े फूल लाना था।
एक दिन अपनी पत्नी के साथ में खोया हेममाली फूल नहीं ला सका। पूजा भंग होने से क्रुद्ध कुबेर ने उसे कुष्ठ रोग से पीड़ित होने और अलका से पृथ्वी पर गिरने का शाप दिया। हेममाली पीड़ा में भटकता हुआ हिमालय में प्राचीन ऋषि मार्कंडेय के आश्रम पहुँचा, और उनके सामने सब कुछ स्वीकार कर लिया।
उसकी सच्चाई से प्रसन्न होकर मार्कंडेय ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने को कहा। हेममाली ने भक्ति से उपवास किया, रोगमुक्त हुआ, और अपना तेजस्वी रूप फिर से पाया। कृष्ण ने घोषित किया कि यह व्रत रखना अठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है और सभी पापों का नाश करता है।
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